क्योंकि हम राम न हुए: डॉ भावना तिवारी ” वही रावण जलाये जो स्वयं राम है ” (दशहरा –विशेषांक 2017)

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क्योंकि हम राम न हुए: डॉ भावना तिवारी

उन्नत उत्साह है चारों ओर
इस छोर से उस छोर
शोर ही शोर
चहुँओर
लगा रहे ज़ोर
माटी के पुतले
जला रहे खपच्चियों पर चढ़े
कागज़ से मढ़े
चमकीले विशाल पुतले।
अथाह आवाम।

क्या कहा
आओ जलाएँ
रावण।
करें पाप से पुण्य तक की यात्रा
करें बुराई से भलाई की ओर गमन।
राम को नमन।

पर इन क्रियाओं के पूर्व
करना है दहन
अंधकार गहन,
करना है हंकार का शमन।
मदांध मानसिक और दैहिक रावण का दमन।

सोचता है मन
भीतर के संताप
शाप
भला हो कि फलीभूत न हुए,
क्योंकि हमने नहीं कीं प्रार्थनाएँ निष्काम
हमने नहीं कीं कामनाएँ
सर्वहारा के हितार्थ।
क्योंकि हम राम न हुए।

तय न किये मानक,
किसी नौकरी के आवेदन की भाँति
ठहरते अयोग्य।
सारी आस्थाएँ हो जातीं तिरोहित,
झूठ करता तार-तार
हम खड़े होते लाचार।

हर बार रावण बचता
हम होते शर्मिन्दा
सोचते क्यों हैं
ज़िन्दा।

निष्काम
न लिया कभी राम का नाम।
हमने भीड़ के पीछे
दौड़ना सीखा
कभी न देखा
अंतस में
जल रहे राम
और अट्टहास करता रावण।

– भावना तिवारी
सी-224,सेक्टर-19
नोएडा-201301
उत्तर प्रदेश
ईमेल – drbhavanatiwari@gmail.com
सचलभाष-9935318378

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