मेरी आवाज ही,पहचान है..गर याद रहे!!

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मेरी आवाज ही,पहचान है..गर याद रहे

28 सितम्बर 1931 का जन्मदिन भगत सिंह को देखना नसीब नही हुआ था,क्योंकि 23 मार्च 1931 को एक क्रांतिवीर आत्मा गुलामी की ज़ंजीरें तोड़कर रुखसत हो चुकी थी…लेकिन एक छोटी सी बच्ची 28 सितम्बर 1931 को अपना तीसरा जन्मदिन मना रही थी…दीना नाथ मंगेशकर के यहां 5 बच्चे पैदा हुए..ये पाचों बच्चे सरस्वती का वरदान थे..लेकिन 28 सितम्बर को दीनानाथ मंगेशकर के यहां खुद सरस्वती ने लता मंगेशकर के रूप में जन्म लिया था..दीनानाथ जी की छोटी सी नाटक मण्डली थी और लता मुश्किल से 10 बरस की थी जब दीनानाथ चल बसे..घर की जिम्मेदारी इस छोटी सी बच्ची ने संभाली और फिल्मों में बाल कलाकार के रुप में काम करने लगी…3 छोटी बहने और 1 सबसे छोटा भाई था ह्र्दयनाथ मंगेशकर.. बहने आशा,मीना और उषा थी..वक्त बीता और पिता से सीखा गया संगीत कुछ काम आया और लता ने फिल्मों में गाना शुरू किया..नूरजहां का दौर था…लेकिन लता की आवाज़ एक अंदेशा लेकर आ चुकी थी कि खास आवाज़ फिल्मो में जन्म ले चुकी है…लता जी ने अपना पहला गीत फ़िल्म “आपकी सेवा में “के लिए गाया और फिर एक गीत ऐसा आया जिसने धूम मचा दी..फ़िल्म थी महल और गीत के बोल थे…..

आएगा-2..आएगा
आएगा आने वाला

इसके बाद का एक युग हिंदी फिल्म जगत में शुरू हुआ…जिसे मैं लता युग कहूंगा….यह युग अपनी मर्जी से शुरू हुआ और अपनी मर्जी से सन्यास को प्राप्त हुआ… लता एक महासागर है जिसपर अनेको किताबें लिखी जा सकती है…लेकिन आज उनके जन्मदिन पे कुछेक खास बातें संक्षेप में सांझा करेंगे ।
1 .लता की माता का नाम शुद्धामती था और उनके पिता की दूसरी पत्नी थी।
2 .लता का असली नाम हेमा था ,लेकिन इनके पिता ने सबसे बड़ी बेटी की मृत्यु के कारण जो उसका नाम सोच रखा था वह लता जी को दे दिया गया
3.लता जी ने पहला गीत मराठी फिल्म किती हसाल के लिए वय था और हिंदी फिल्मो में पहला गीत 1946 में बनी फिल्म “आपकी सेवा में” के लिए गाया ।
4.लता मंगेशकर अब तक 38 से अधिक भाषाओं मे 30000 से अधिक गाने गा चुकी हैं।
लता मंगेशकर ने 1980 के बाद से फ़िल्मो मे गाना कम कर दिया और स्टेज शो पर अधिक ध्यान देने लगी।
लता ही एकमात्र ऐसी जीवित व्यक्ति हैं जिनके नाम से पुरस्कार दिए जाते हैं।
5.लता ने उस्‍ताद बड़े गुलाम अली खान, पंडित तुलसीदास शर्मा तथा अमानत खान देवसल्‍ले से संगीत सीखा। 1948 में विनायक की मौत के बाद गुलाम हैदर लता के संगीत मेंटर बने।
6. आप हमेशा गाना रिकॉर्ड करने से पहले चप्पल उतार कर नँगे पांव गाना गाती रही है ।
7.आपने जीवन पर्यन्त शादी नही की और अपने बहन भाइयों और गायन को अपना सर्वस्व जीवन अर्पण किया है ।
8.आप क्रिकेट की बहुत शौकीन है और सचिन तेंदुलकर को अपना मुंहबोला बेटा मानती है ।
9 आपने पहला फ़िल्म फेयर 1959 में मधुमती के गीत “आजा रे मैं तो कब से खड़ी इस पार” के लिए जीता ।
10 .1969 में अपना फ़िल्म फेयर लेते हुए आपने खुद को इस पुरस्कार से परे कर लिया तांकि नई प्रतिभाओं को मौका मिल सके ।
11. आपका जन्म तो मध्य प्रदेश के जिला इंदौर के सिक्ख मुहल्ले में हुआ ,लेकिन आपके पूर्वज गोआ के मंगेशी गाँव के थे इसलिए आपके नाम के पीछे मंगेशकर लगता है ।
12.क्या आपको पता है कि लता जी ने गुस्से में 5वी कक्षा से स्कूल छोड़ दिया था और ज्यादा शिक्षा प्राप्त नही की..लेकिन यह वो शख्सियत है जिसे अमेरिका की न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी डॉक्टरेट की डिग्री देकर सम्मानित करती है ।
13.सभी की खोज खबर रखने वाला गूगल भी सही अनुमान नही लगा पाया कि लता जी ने कितने गीत गाए है ।

…..दोस्तो ! लता जी के बारे में कुछ भी लिखना अति कठिन है…इनके जीवन से संबंधित मैंने एक गहरा अध्ययन किया है और सबसे खास बात यह रही कि लता का कद विराट है ,हिमालय सा.. लेकिन ज़मीन से जुड़ी हुई एक देवी है लता.. अनेकों interviews सुने मैंने इनके और देखा कि अति सरल और छोटी छोटी बातें करती है लता जी ।

आज केवल एक संदेश जरूर दीजिये सभी को कि लड़कों और बेटों में भगत सिंह जिंदा करेंगे तो हिन्द बच पाएगा… और लड़कियों या बेटियों को अगर लता जी की मधुरतम आवाज़ के साथ जोड़ेंगे तो ये भटकती हुई और संस्कारों से कमजोर होती हुई बेटियां भारतीय नारी की असली सुरभि से फिर से भरना शुरू होगी…
आप सबसे निवेदन है कि स्कूलों,कॉलेजेस ,घरों और समागमों में लता जी की आवाज़ फ़िज़ा में भरने की कोशिश करें…क्योंकि उनकी आवाज़ साक्षात सरस्वती की आवाज़ है……
दुर्गा अष्टमी की सुबह मुबारक 

राजकुमार  ‘राज ‘,अमृृृतसर

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