हँसता हुआ चेहरा

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हँसता हुआ चेहरा (ग़ज़ल)

मत दिखा अपना हँसता हुआ चेहरा किसी को
हर इंसान यहाँ तेजाब लिए फिरता है।।
यकीं कर वही चेहरा रुला देगा तुझे,
जिस चेहरे का तू ख्वाब लिए फिरता है।।
आदत डाल ले उस चेहरे के बिना जीने की
वरना जमाना कहेगा तू शराब लिए फिरता है।।
मत कर बेवफाई का जिक्र दुनिया के सामने ,
चाहने वाले कहेंगे नफरत बेहिसाब लिए फिरता हैं ।।
ना होती रूसवा हमसे हमारी मोहब्बत ,
तो जमाना भी कहता क्या आब लिए फिरता है।।
मत सुनाया कर दिल पर बीती हर किसी के सामने
वरना जमाना कहेगा कि गमों की किताब लिए फिरता हैं 

मुक्तक

हो जाए अगर जीत तो तदब्बुर कहता है।
हो जाए अगर हार तो मुकद्दर कहता है।
लम्हा लम्हा रोया हू तेरी याद मे रात भर
उन लम्हो की कहानी समंदर कहता है।

सौरभ
20 अक्टूबर 1994
तिजारा (अलवर) राजस्थान

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