माँ दुर्गा : वंदना(प्रशान्त मिश्रा मन)

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माँ दुर्गा : वंदना

नमो मात आर्या नमो दक्षकन्या।
नमो भगवती माँ नमो मृत्युशय्या।
नमो हे सती आद्य दुर्गा अनंता।
करो पूर्ण कारज मेरी विघ्न हरता।

नमो वृद्धमाता नमो घोररूपा।
नमन है तुझे चित्तरूपा स्वरूपा।
चली आओ माता धरा फिर पुकारे।
सुनो अर्ज सबकी खड़े भक्त द्वारे।

बढ़ा पाप जग में कृपा आज कर दो।
सभी दीन दुखियों की झोली को भर दो।
करो दिव्य ज्योति से जगमग उजाला।
चिता रूप अंदाज सबसे निराला।

बढ़ा पाप जब भी लिया रूप चण्डी।
किया पापी’ का नाश बन के चामुंडी।
तू ही शारदा शक्ति भाव्या भवानी।
तू ही देवमाता है दिव्या भवानी।

नमो मात दुर्गा हे भव्या अभव्या।
नमामी जया चिति सदागति माँ नित्या।
हुआ कलयुगी शुम्भ हावी उदय पर।
निशुम्भा खड़ा घात करने हृदय पर।

त्रिनेत्री कहाँ तू सुनो ये गुहारें।
तेरी मूर्तियाँ देख भक्ता’ निहारें।
चली आओ माता मिटा दो अँधेरा।
रहे सत्य जग में हो सच्चा सवेरा।

नमो मात चित्रा हे प्रथमेश्वरी माँ।
नमो कालिका क्रूरा’ माहेश्वरी माँ।
बने हम अजेयं हे कात्यायनी माँ।
हृदय शुद्ध कर काली’ नारायणी माँ।।

प्रशान्त मिश्रा “मन”,उत्तरप्रदेश,
महाराजगंज

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