धन वैभव:दोहे साधक के

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              धन वैभव
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एक तरफ़ तो लग रही धनवानों में होड़ ।
और कहीं पर बेबसी रही रोज दम तोड़ ।।
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अरब-खरब धन जोड़ कर और लगी है आस ।
मरघट तक बुझती नही पैसा की ये प्यास ।।
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सौ दुक्खों की इक दवा करती उलझन भंग ।
धन से ही जीवन खिले धन बिन मनुज अपंग ।
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बात कहूँ बिल्कुल सही मान भले मत मान ।
उसका ही है ये जगत दौलत जिसकी जान
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धन वैभव जिस पास है वो ही परम विद्वान ।
कंगला के मुख से कभी नही सुहाये ज्ञान ।।


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सुरेन्द्र साधक – दिल्ली – 9899494586

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