नए दिन और नई रातें(धर्म-दर्पण)

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नए दिन और नई रातें..(धर्म-दर्पण)

कोई भी धर्म जब वैज्ञानिकता के रंग में रंग जाता है तो वह धार्मिक विचारधारा सही मायनों में अध्यात्म को प्राप्त करती है..क्योंकि अध्यात्म.. केवल कोई अंध-विश्वासों से भरी किर्या नही बल्कि एक प्रयोग है जो कि किसी धर्म की theory या विचारधारा पे चलकर कोई खोज करता है ..अतः अध्यात्म एक अंदर की खोज है..स्वयं की खोज…
दोस्तो.. भारतभूमि का सौभाग्य रहा है कि इसमें धर्म-विज्ञान अति उच्च आयामों को छू चुका है..और इस धरा का सबसे पुरातन धर्म सनातन धर्म हर पहलू से विज्ञान से जुड़ा है…क्योंकि यह वो धर्म है जिसके निर्माता अनन्त है..कुछेक को ग्रन्थ बता देते है और बहुत से गुमनाम है…ये वो ऋषि मुनि (विज्ञानी)थे ,जिनकी कोई न कोई उच्च खोज रही या प्राप्ति रही..यही खोज या प्राप्ति उन्होंने विभिन्न रूपों में(लिखती,मन्त्र ,हवन-यज्ञ और धर्म-किर्या) समाज और राष्ट्र को सौंपी है….नवरात्रे 2 बार आते है..और दोनों बार का समय ठीक वो समय है जिसमे मौसम और कुदरत का मिजाज रंग बदलता है…कुदरत जब भी कोई करवट लेती है तो समस्त धरातल और इसपे बसने वाले जीव और वनस्पति पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है….नवरात्रों के उपवास इस बात का प्रतीक है कि नए मौसम से पाचन क्रिया का तालमेल बिठाने के लिए कुछ हल्का और कम खाना लाज़मी है..तभी तो पौष्टिक और हल्का भोजन उपवासकर्ता खाते है..यही नही तन शुद्धि के साथ साथ मन शुद्धि की क्रिया भी शक्ति के निरन्तर पूजन और पाठ सहित चलने का अर्थ है कि मन पर काबू,विचारों की मलीनता को साफ करना और अंदर की सोई शक्तियों को जागृत करना…
नवरात्रों में दुर्गा या शक्ति के 9 अल्ग-अल्ग रूपों का पूजन किए जाने की विधि है..हर देवी का नाम,स्वभाव,मन्त्र,पूजनविधि और भोग अल्ग-अल्ग है…जिसकी जानकारी सनातन धर्म से सम्बन्ध रखने वाले बहुत बड़े वर्ग को भी नही है….सच पूछिए तो नवरात्रे साधारण नर और साधक दोनो के लिए लाभकारी है…सेहत से भी और साधना से भी…
🌹प्रथम नवरात्र पूजन दुर्गा के पहले रूप शैल कुमारी जी के नाम से शुरू होता है और साधक इसमे खुद को मूलाधार चक्र से ऊपर उठाने का प्रयास करता है…..दरअसल नवरात्रे बदलते मौसम के साथ सनातन धर्म के जरिए एक संदेश देते है कि आपके अंदर का मौसम ठीक होना लाजमी है…नवरात्रे दुर्गा के 9 रूपों में 9 निधियों की प्राप्ति का प्रयास है और ये 9 निधियां कहीं और नही हमारे अचेतन मन के किसी गहरे कोने में सोई होती हैं…
प्रथम नवरात्रे को मां शैल कुमारी के चरणों में प्रणाम और माता को समर्पित मन्त्र सभी प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें
वन्दे वञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् | वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ||

राजकुमार राज,शिक्षक ,अमृतसर।

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