मानवता अपना ले बंदे!

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मानवता अपना ले बंदे(सुशील शर्मा)

मानवता अपना ले बंदे।
मिट जाएंगे सारे फंदे।

प्रभु ने तुझ को जनम दिया है।
तुझ पर ये उपकार किया है।
जिसने मानवता अपनाई।
उसने जीवन का उद्धार किया है।
छोड़ के सारे गोरख धंधे।
मानवता अपना ले बंदे…..

मानवता है एक सवेरा
न कुछ तेरा न कुछ मेरा।
सब धर्मों से ऊंचा देखो
दीन दुखी के मन का फेरा।
सेवा के लटका के फुन्दे।
मानवता अपना ले बंदे…..

मानवता है प्रभु का दर्शन।
दीन दुखी का करके अर्चन।
जीवन को तू सदगति दे दे।
मानवता का कर पूर्ण समर्पण।
त्याग विचार ये सारे गंदे।
मानवता अपना ले बंदे…..

सब धर्मों की सीख यही है।
जीवन की बस रीत यही है।
मानवता में बस जा मानुष।
हार नही है जीत यही है।
बंद करो सब काले धंधे।
मानवता अपना ले बंदे….

चारों ओर है घुप्प अंधेरा।
कलुषित मन के कुत्सित ‘डेरा’
अब मानवता को कौन बचाये।
लाकर नूतन नया सबेरा।
कलुष विचार को करके मंदे।
मानवता अपना ले बंदे….

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