दादी की कमाई

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     दादी की कमाई ( जियाउल हक)

आठ साल का मनोज दादी की गोद में झूलते हुए बोला “दादी-दादी! आज तो तुम को विधवा पेंशन मिलेगी तो मेरे लिए एक बैग लेकर आना। इस झोले में अपनी किताब लेकर अब मैं स्कूल नहीं जाऊँगा। सारे लड़के बैग लेकर जाते हैं, केवल मैं ही झोला लेकर जाता हूँ।”
दादी ने जब अपने कलेजे के टुकड़े की यह बात सुनी तो मंद-मंद मुस्कुरा कर बोली “तुझको तो अभी तक गिनती -पहाड़ा आता नहीं और बैग लेकर जाएगा स्कूल!
मनोज- “देख दादी ,तुमने तो पापा को विदेश भेज दिया–पैसे कमाने के लिए ।पापा आज तीन साल से विदेश में ही बकरी और ऊँट चरा रहे हैं। उनका तो मालिक ना पैसा दे रहा है और ना ही पापा को घर भेज रहा हैं, और माँ घर में ही रहती है उसको तो कोई पैसा देता नहीं, तुझे तो सरकार महीने का एक हजार रुपए देती है, उसी से गुजर बसर ….जो होती है। अब मैंने बोल दिया कि मुझे बैग चाहिए तो चाहिए, कहीं से भी मुझे बैग चाहिए।” बेटा विदेश में जाकर फँस गया है, इस याद में दादी की आँखे भर आई और अब अपने पोते का मन रखने के लिए बोली “ठीक है, आज बैंक जाऊँगी, पैसा मिलेगा तो बैग लेकर आऊँगी, जा, यह चार किलो गेंहू लेकर चक्की में दे आ पीसने के लिए।”
मनोज- “गेंहू तो पीसने के लिए ले जाऊँगा, पर जब पीस देगा तो मै लेकर नहीं आऊँगा ।तुम जाना लाने, लाला बहुत खराब आदमी हैं बराबर पैसे के लिए मेरी बेइज्जती करता हैं।”
दादी- “तू चुपचाप लेकर जा ।आज पैसा मिलेगा तो लाला का पूरा पैसा दे दूंगी।”
मनोज गेंहू लेकर चक्की चला गया और दादी बेबस होकर बेटे की याद में रोने लगी ।पता नहीं बेटे का जालिम मालिक कब उसे अपने देश आने देगा।
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जियाउल हक
जैतपुर सारण बिहार
पिन कोड- 841205

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  1. अचिन्त साहित्य के सभी सदस्य को सादर प्रणाम

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