मैसेज़ (लघुकथा)

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फोन पर मैसेज़ घंटी की आवाज़ सुनते ही सिमरन ने झट से रोजाना की तरह फोन हाथ में लिया और शीघ्रता से मैसेज पढ़ा ।ओह!बड़बड़ाती हुई !सोमवार से स्कूल समय 7.30 बजे हो गया ।कुछ सैकेंड की चेहरे पर आई शिकन खुशी में बदल गई।मम्मी ,मम्मी अब जल्दी स्कूल लगेगा और छुट्टी भी लेट होगी।
मम्मी बोली,”अरे ,ये क्या बात हुई,जल्दी जाना और लेट आना।हाँ ,मम्मी अच्छा ही तो है ।मैं आपके विद्यालय से घर आने के बाद ही घर आया करूँगी। मुझे अब घर  का ताला खोलना नहीं पड़ेगा और
रास्ते के आवारा कुत्तों  से डर भी नहीं लगेगा।
जब से दादी का देहान्त हुआ है ,तब से अकसर मुझे घर का ताला खोलने की समस्या रहती थी ।अब गर्मी आ गई है ,क्योंकि स्कूल का समय सुबह जल्दी हो गया है ।सब लोगों को गर्मी अच्छी नहीं लगती ,पर मम्मी मुझे गर्मी बड़ी अच्छी लगती है क्योंकि आप हमेशा मेरे स्कूल से आने से पहले मुझे हँसते हुये दरवाजे पर मिला करोगे। 
– डॉ०पूर्णिमा राय,अमृतसर।
7087775713
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