हिंदी का गौरव गान!! (अनीला बत्रा)हिन्दी दिवस14सितंबर2017

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हिंदी का गौरव गान!! (अनीला बत्रा)

मधुर मधुर स्वर कानों में घोले
जिह्वा पर जैसे मिश्री घोले
हर शब्द में है मानो मीठी तान
ऐसा है हिंदी का गौरव गान।
देवनागरी लिपि से जन्मी यह
जैसा बोलो वैसा लिखती है
अलंकारों के पहन आभूषण
शब्दों को रुचिकर करती है।
मुहावरे मन को छूते लगते
कहावतें ज्ञान कोष भरती हैं।
व्याकरण के नियम अनूठे
हिंदी को श्रेष्ठ सिद्ध करते हैं।
अपने देश की प्रिय भाषा
जन जन की अभिव्यक्ति बने
ऐसी दुआ हैं हिंदी हमारी
अनवरत यूं ही प्रगति करे।

-अनीला बत्रा।
(हिंदी मिस्ट्रेस)
सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मकसूदां।
जालंधर।
एम.ए, बी.एड।

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