हिंदी ! एक उद्दात्त परम्परा है !!(डॉ. शशि जोशी ‘शशी )हिन्दी दिवस14सितंबर2017

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हिंदी ! एक उद्दात्त परम्परा है !!
(डॉ .शशि जोशी ‘शशी’ )

हिंदी मात्र एक भाषा नहीँ !
एक उद्दात्त परम्परा है !
जीवन का जीवंत मुहावरा है !
हिंदी ,
संस्कारों की प्रचारक है !
विवेकानंद सरीखी श्रेष्ठ विचारक है !
हिंदी ,
व्यष्टि से समष्टि तक ले जाती है !
उदात्तता की गाथाएँ सुनाती है !
“मैं “से ऊपर उठना सिखाती है !
हृदय में फुलवारी खिलाती है !

हिंदी ने सदा हँस -हँस कर
अपनत्व की गंध बिखेरी है !
मनुजता की सच्ची तस्वीर उकेरी है !

जहाँ आज भी कान्वेन्टो में –
धन और रौब , का मद बिखरता है ,
वहीँ पाठशालाओ के मासूम चेहरों पर,
सादगी का भाव उभरता है !

नकली फूलों से गमले सजाने वालों !
हिंदी से दूरी बनाने वालों !
लौट आओ अपने संस्कारों में !
जिओ सरलता से अपने परिवारों में !

अन्यथा ,
आयातित भाषा …आयातित सोच
देह से आत्मा निकाल लेगी !
तुम्हें भोग के घिनौने दलदल में डाल देगी !

जहाँ …

सुख के साधन बाहर होंगे ..
और भीतर बेचैनी !
शैय्या होगी ..पर निद्रा नही ,
व्यंजन होंगे पर क्षुधा नही !

अतृप्त आकांक्षाएं मृग मरीचिका बन जाएँगी !
तुम्हें लालसा की अंधी दुनिया में भटकाएंगी !

जहाँ सिवा पश्चाताप के कुछ न होगा !
जीवन का अर्थ मिट चुका होगा !

इस से पहले कि कुछ और अधिक अनर्थ हो !
जीवन तथाकथित आधुनिकता में व्यर्थ हो !

लौट आओ !
अपनी भाषा को हृदय से लगाए !
स्वाभिमान से अपना मस्तक दमकाए !

आयातित भाषा का ज्ञान तो रखो पर – सिर पर न चढ़ाओ !
ये सीढ़ी मात्र है !
इस पर पाँव रख आगे बढ़ आओ !

अपनी भाषा ही तुम्हें संस्कार देगी !
जीवन को वास्तविक आकार देगी !

हिंदी को मुकुट बनाओ !
सिर पर सजाओ !
सदविचारो से प्रगति पथ पर जाओ !

अपनी भाषा ही अपनी सच्ची पहचान है !
इसी में उन्नत भविष्य ..
इसी में उन्नत वर्तमान है !

 

(डॉ .शशि जोशी “शशी ”
जी .जी .एच .एस .बाँगीधार ,सल्ट
अल्मोडा ,उत्तराखंड )

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