सुनो व्यथा प्रभु आप हमारी!

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 सुनो व्यथा प्रभु आप हमारी!  (चौपाई छंद)

सुनो व्यथा प्रभु आप हमारी।हम किसान हैं दीन दुखारी।।
धरती का हम सीना चीरें।उठती हिय में हैं कछु पीरें।।
फसल बोय हरियाली लाएँ।अन्न उगा खुशहाली पाएँ।।
वर्षा की हम राह निहारें।लखि अंबर प्रभु तुम्हें पुकारें।।
होय नहीं प्रभु कृपा तुम्हारी।सूखे फसल सम्पदा सारी।।
सूखा है धरती का आँगन।अबकी कम बरसा है सावन।।
क्वार मास में धूप सताए।धरती प्यासी फटती जाए।।
बिन जल के जीवन क्या दीना।इसकी महिमा कहती मीना।।
कृषकों के मुख चिंता छाई।अब करते बस राम दुहाई।।
प्रभु हम पर निज नेह दिखाओ।बिन विलम्ब पानी बरसाओ।।
हम सबका है जीवन खेती।यही निवाला हमको देती।।
हमको प्रभु नहिं आप सताओ।सूखी धरती नीर गिराओ।।

आशीष पाण्डेय ज़िद्दी।
9826278837

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