प्रिय के प्रति (कविता)

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भीड़ में कभी भीड़ न बनना
जीवन में पहचान बनाना ।।

दिल से कभी तंगदिल न रहना
हारों में भी जश्न मनाना ।।

मेरी तेरी कभी न करना
औरों को भी राह दिखाना ।।

संकट में कभी मौत न चुनना
पर पीड़ा को गले लगाना ।।

कष्टों में कभी न घबराना
अमावस को ‘पूर्णिमा’ बताना।

– डॉ०पूर्णिमा राय,अमृतसर।
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