डॉ.पूर्णिमा राय: गर्व करें कि हम शिक्षक हैं-मेरे शिक्षक मेरा आदर्श (5सितंबर2017 विशेषांक)

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डॉ.पूर्णिमा राय: गर्व करें कि हम शिक्षक हैं!!.

* दूसरों पर व्यंग्य कर शोभित होना—-शिक्षक के सिद्धान्तों के विरुद्ध है।

* दूसरों की बुराई कर जीत का डंका बजाना—–उसके व्यक्तित्व विकास में अवरोध है।

* शिक्षक की सफलता—–उसके अस्तित्व में निहित है।
* शिक्षक की निष्फलता—-अध्ययन-अध्यापन में समाहित है
* शिक्षक होकर—– अन्याय करना निंदनीय है।

* शिक्षक होकर—– कर्तव्य निभाना प्रशंसनीय है।

* शिक्षक होकर —— भिक्षुक बनना असहनीय है।

* शिक्षक होकर——- रक्षक बनना सम्माननीय है।

* शिक्षक होकर ——-खुशामद करना प्रताड़नीय है।

* शिक्षक होकर—–स्वाभिमान बचाना शोभनीय है ।

डॉ.पूर्णिमा राय
शिक्षिका एवं लेखिका
ग्रीन एवनियू,घुमान रोड,
तहसील बाबा बकाला,
मेहता चौंक,143114
अमृतसर,(पंजाब)
drpurnima01.dpr@gmail.com

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