डॉ.पूर्णिमा राय: वे शिक्षक याद आते हैं!-मेरे शिक्षक मेरा आदर्श (5सितंबर2017 विशेषांक)

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डॉ.पूर्णिमा राय: वे शिक्षक याद आते हैं!!

करें सम्मान गुरुजन का हमें जीना सिखाते हैं।
मुसीबत के विकट पल में सरल हल वे बताते हैं।।

दिखावे से भरी दुनिया में लगती ठोकरें है जब;
बढ़ाकर हाथ गुरुजन ही हमारे गम मिटाते है।।

दिखाते राह सच्चाई विवेकी सोच वे रखते;
विनाशक पापियों को भी भलामानस बनाते हैं।।

बहुत सुंदर है ये जीवन अगर गुरु आँख से देखें;
नयन संज्ञान मनमोहक जगत को गुरु दिलाते हैं।।

बनें इंजीनियर नेता इबादत करते’ शिक्षक की;
वकीलों को वकालत भी सदा गुरुजन पढ़ाते हैं।।

कबीरा ,सूर औ”तुलसी, कभी रसखान कहलाये;
सरलता सादगी से वे सभी के मन को भाते हैं।।

महादेवी, निराला, पंत और प्रसाद को पढ़ लो;
नवेली सोच के मालिक सभी गुणगान गाते हैं।।

विवेकानंद राधा कृष्ण टैरेसा को’ पूजे जग;
निभाकर फर्ज वे अपना चले चुपचाप जाते हैं।।

झुकाकर शीश को अपने नमन करती हूँ मैं गुरुवर
तुम्हारी ही इनायत से चमन को हम सजाते हैं।।

हमेशा बुद्धिजीवी का करो तुम “पूर्णिमा” आदर ;
जो’ डाँटेंगे शरारत पर वे शिक्षक याद आते हैं।।

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