अनीला बत्रा:मैडम का कटाक्ष-मेरे शिक्षक मेरा आदर्श (5सितंबर2017 विशेषांक)

0
151

अनीला बत्रा:मैडम का कटाक्ष (संस्मरण)

शिक्षक का स्थान किसी के भी हृदय में उसी श्रेणी में रखा जा सकता है,जिसमे माता पिता रहते हैं। बच्चे गीली मिट्टी की तरह ही तो होते हैं,चाहे जिस सांचे में ढाल लो।बचपन को याद करती हूँ तो सहपाठियों की बातें याद हों न हों पर कुछ शिक्षकों की छवि अवश्य उभर कर सामने आ जाती है।मैं केंद्रीय विद्यालय आदमपुर,ज़िला जालंधर में पढ़ी हूँ। हर राज्य से जुड़े बच्चे वहाँ पढ़ते थे क्योंकि उनके पिता वायुसेना के कर्मचारी होते थे। नवम कक्षा में आते आते जब नारी सुलभ गहनों का आकर्षण हुआ तो पहली ही बार कानों में पहने टॉप्स पर अंग्रेज़ी अध्यापिका अमिता मैडम का कटाक्ष आज भी नहीं भूली,” अनीला, अब इन्ही में उलझ जाओगी,पढ़ने में दिल नहीं लगेगा”।ऐसा असर हुआ कि शिक्षा काल में कभी श्रृंगार की ओर मन नहीं दौड़ा। हिंदी के प्रति प्रेम खून में था। माता जी श्रीमती संतोष बत्रा भी हिंदी शिक्षिका थी, मेरी पहली गुरु, जिन्होंने हर प्रतियोगिता, हर गतिविधि में मुझे प्रोत्साहित किया। ग्यारहवी कक्षा में श्रीमती सरला धर और बारहवीं में श्रीमती जसवंत मिन्हास,इन हिंदी अध्यापिकाओं के व्यक्तित्व ने एक लक्ष्य तो निर्धारित कर ही दिया,बनना तो हिंदी अध्यापिका ही है। भूगोल में ऑनर्ज़ कर गयी क्योंकि सरकारी कॉलेज होशियारपुर में प्रोफ़ेसर श्री मानकू सर बहुत बेहतरीन थे। हिंदी साहित्य के महान लेखक एवं प्रोफेसर श्री विनोद शाही ने उत्साह बढ़ाया,”कभी लिखना मत छोड़ना अनीला”।आज भी उनका विश्वास उत्साह बढ़ाता है।
आज *मेरे शिक्षक,मेरा आदर्श*विषय ने सभी स्मृतियाँ जीवंत कर दी। मेरे जीवन के प्रेरक गुरुओं को मेरा सादर नमन।

अनीला बत्रा
हिंदी मिस्ट्रेस,
सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल मकसूदां,जालंधर।
एम.ए, बी.एड।

Loading...
SHARE
Previous articleमधु छाबड़ा ‘महक’ :अनपढ़ता -मेरे शिक्षक मेरा आदर्श (5सितंबर2017 विशेषांक)
Next articleज्योति श्रीवास्तव : आधुनिक शिक्षक-मेरे शिक्षक मेरा आदर्श (5सितंबर2017 विशेषांक)
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here