डॉ.पूर्णिमा राय: तमाचा -मेरे शिक्षक मेरा आदर्श (5सितंबर2017 विशेषांक)

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डॉ.पूर्णिमा राय: तमाचा 

लारेंस रोड ,अमृतसर में स्थित डी.ए.वी कॉलेज के विपरीत दिशा में बना आर्य समाज स्कूल का द्वितीय कक्षा का वह कमरा जो लम्बी बंद अँधेरी गली की मानिंद स्कूल के दूसरे फ्लोर पर नुक्कड़ में था,उस कमरे में कुर्सी पर बैठी भारी भरकम सुडौल काया वाली खूबसूरत महिला ,स्लीवलैस ब्लाउज और प्यारी सी साड़ी पहने मिसेज शर्मा की धुँधली सी तस्वीर आज भी स्मृतियों में ज्यों की त्यों चलचित्र की तरह सजीव हो जाती है ।उस दिन मैं थोड़ा सा स्कूल लेट हो गई थी ।कक्षा में अंग्रेजी पढ़ाने वाली मिसेज शर्मा अटैंडैंस लगा रही थी।एक तो शान्त बंद गली और दूसरी ओर जूतों की खटखट गूँजती आवाज मेरे डर को तिगुणा कर रही थी।भागकर एक दम ब्रेक लगाते मेरे पाँव कक्षा के दरवाजे पर ठिठके तो मिसेज शर्मा के सिर हिलाने के संकेत को समझ मैं अपना सा मुँह लेकर कक्षा में सबसे अन्तिम सीट पर बैठ गई।अंग्रेजी की किताब खोलो…ध्वनि सुनकर किताब खोली ।मिसेज शर्मा पढ़ाने लगी ।चारों ओर शान्ति थी।स्तब्ध वातावरण था !! तभी अचाकन मेरे मुँह से सीटी जैसी आवाज़ निकली ।बस फिर क्या था।कौन है ??चुपचाप खड़े हो जाओ वर्ना…..कुछ सैकंड चप रहने के बाद मिसेज शर्मा ने कहा …देखो,अपने आप बता दो,आवाज़ किसने की!! मैं सच कहती हूँ..उसे कुछ न कहूँगी।हिम्मत जुटाकर मैं धीरे से आगे बढ़कर मिसेज शर्मा के पास पहुँच गई।फटाक का तमाचा मेरे नन्हें गालों पर जैसे ही पड़ा…आँखें आँसुओं से भर गई।आगे से ऐसा मत करना…चलो सीट पर!!!!

आज भी जब वह घटना स्मृतिपटल पर आती है तो मुझे झकझोरती है कि कभी भी बाल मन के साथ मिसेज शर्मा की तरह व्यवहार मत करना।कहीं ऐसा न हो कि बच्चे डाँट /मार के डर से कभी सच बता ही न पायें।मैंने आज तक छात्रों के समक्ष वही बात कही है जिस पर मैं खुद अमल करती हूँ।

डॉ.पूर्णिमा राय
शिक्षिका एवं लेखिका
ग्रीन एवनियू,घुमान रोड,
तहसील बाबा बकाला,
मेहता चौंक,143114
अमृतसर,(पंजाब)
drpurnima01.dpr@gmail.com

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