राहुल द्विवेदी ‘स्मित: गुरु नाविक-मेरे शिक्षक मेरा आदर्श (5सितंबर2017 विशेषांक)

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राहुल द्विवेदी ‘स्मित: गुरु नाविक

श्रद्धा का है आवरण, अंदर झूंठी शान ।
शिष्य दान सा दे रहे, गुरुओं को सम्मान ।।

गुरु शिल्पी की भाँति ही, देता शिशु को रूप ;
माटी के तन में मिला, संस्कारों की जान ।

जिसको सच्चा गुरु मिले, समझे वह सौभाग्य ।
होती सबके भाग्य में, कब हीरे की खान ।।

खुद जलता है उम्र भर, देता मगर प्रकाश ।
उसी दीप की भाँति तुम,और तुम्हारा ज्ञान ।।

टूटी जीवन नाँव पर, बैठा जीव अबोध ।
पार हुआ भव जब मिला, गुरु नाविक का ज्ञान ।

राहुल द्विवेदी ‘स्मित’,लखनऊ

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