कामनी गुप्ता: मास्टर जी!-मेरे शिक्षक मेरा आदर्श (5सितंबर2017 विशेषांक)

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कामनी गुप्ता: मास्टर जी!

जैसे ही सोमनाथ जी ने घर पर कदम रखा, रमा ने एक लम्बी सामान की लिस्ट थमा दी, सोमनाथ जी जानते थे कि आज रमा गुस्से में है, दरअसल वो चाहती थी कि सोमनाथ जी कुछ ऐसा काम करे कि तन्ख्वाह के साथ कुछ और कमाई भी हो सके जिससे वो घर चलाने के साथ साथ और खर्चे भी पूरे कर सके। पर सोमनाथ जी अपने उसूलों के पक्के और ईमानदार थे। सोमनाथ जी ने रमा से बहुत बार कहा कि जो है उसी मे जीना सीखो पर उसमे रमा को लगता था ज़रुरतें पूरी होती हैं ख्वाहिशें नहीं। रमा ने आज फिर पुराना राग अलापना शुरु कर दिया था कि मुहल्ले के बिजनैस मैन रवि ने अपने बेटे को पास कराने के बदले कितने पैसे देने को कहा किसी को पता भी नहीं चलना था, पर नहीं आपको तो आपके उसूल पसंद हैं। इज्जत जो मुहल्ले में है और स्कूल में है उससे घर नहीं चलते। ट्यूशन ही पढ़ा लो पर नहीं ! स्कूल में फ्री बच्चों को ओवरटाईम देते हो तो ट्यूशन क्यों पढ़ेगे वो। रमा , वो गरीब बच्चे हैं कहाँ से लाएंगे ट्यूशन के पैसे ! पर हम तो अमीर हैं रमा भी जवाब दे देती। सोमनाथ जी बच्चों को अच्छे संस्कार देना चाहते थे ,पर रमा शायद धन दौलत से उनकी ज़िन्दगी संवारना चाहती थी।


कामनी गुप्ता,जम्मू
Kamnigupta18@gmail.com

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