सत्या शर्मा ” कीर्ति : शिक्षक और मैं-मेरे शिक्षक मेरा आदर्श (5सितंबर2017 विशेषांक)

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सत्या शर्मा ” कीर्ति : शिक्षक और मैं

हे गुरु जी ,दे दीजिए मुझे,
साक्षरता की एक किताब;
पढ़ तो नही पाऊँगी, फिर भी
मैं अक्षरों को जीना चाहती हूँ!!

सुना है, लोग उसको लेकर,
हो जाते हैं ज्ञानी बहुत;
मैं भी छूकर चंद मिनटों में,
कालिदास बन जाना चाहती हूँ !!

क्या होता है शब्दों का चक्र,
ये तो मुझको ज्ञात नही;
कुछ वर्णों का मेल मिलाकर
हर भेद समझना चाहती हूँ ।।

अक्षर -अक्षर का ज्ञान कैसा ,
क्या शब्द-शब्द का फेर है;
जीवन को जो खिला देता
उस अर्थ को समझना चाहती हूँ !!

सुना है बहती ज्ञान की धारा ,
इन पुस्तक के पन्नों से;
पर मुझ जैसों तक बह कर आये ,
वो गंगा निकलना चाहती हूँ ।।

सोचती हूँ आज लिख दूँ,
मैं भी कोई एक किताब;
पर मैं तो कोई शिक्षक नहीं

सत्या शर्मा ” कीर्ति ,रांची)

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