सफेद सुन्दरी(कहानी)धारावाहिक-9 (समाप्ति)

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सफेद सुन्दरी(कहानी)धारावाहिक-9 (समाप्ति)

प्रेम और व्यथा में हम जिसे पुकारते हैं उस तक हमारी पुकार ज़रूर पहुंचती है । शेरनी के बच्चों की पुकार भी शहज़ादे तक पहुंची और शहज़ादे को सब याद आ गया ।शहज़ादा आधी रात नींद से उठ बैठा और शहज़ादी से बोला कि उसे सब याद आ गया है । शहज़ादे ने शहज़ादी को सब बातें बताई । वो हैरत से सुनती रही और सोचती रही कि क्या ऐसी भी कोई औरत हो सकती है जो अपने पति को खुद क़त्ल कर दे।
शहज़ादे ने शहज़ादी से कहा कि “मुझे जाना होगा ताकि शेरनी के बच्चों की जान बचाई जा सके।वो मुझे पुकार रहे हैं। ” शहज़ादी ने कहा कि “नेक काम से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए उसमें चाहे कितना भी जोखिम क्यूँ न हो ।”
शहज़ादे को शहज़ादी के पिता शहंशाह ने
एक उड़न खटोला दिया और साथ सेना भी भेजी । शहज़ादा उड़न खटोले में बैठ कर उड़ चला विरान देश की ओर जिसमें कुछ लोगों को शहज़ादे ने अपनी ज़िम्मेदारी पर ला कर बसाया था।
शहज़ादे का उड़न खटोला जब उस विरान देश पहुंचा तो सर्दियों के दिन थे । राक्षस अपने घने काले जटाओं जैसे बाल धो कर छत पर बैठा मज़े से सुखा रहा था। राक्षस की नज़र दूर से आते उड़न खटोले पर गई । चील जैसी तेज़ नज़र वाले राक्षस ने देखा कि उड़न खटोले में शहज़ादा है और उसी की तरफ आ रहा है । राक्षस लगभग चिल्लाते हुए छत से नीचे भागा और उस धोखेबाज़ औरत से बोला शहज़ादा ज़िन्दा है और मुझे मारने आ रहा है। वो ज़ोर से हंसी और बोली कि शहज़ादे का डर तुम्हारे मन में इस क़दर बैठा है कि तुम्हे सब जगह वो ही दिखाई देता है ।

राक्षस ने काले दिल वाली सफेद सुंदरी से कहा मैं सच कह रहा हूँ । तब तक शहज़ादा सर पर पहुंच चुका था । जिस शहज़ादे को अपने हाथों से मारा था वो ज़िन्दा कैसे हो गया? हसीन क़ातिल की आँखें खुली की खुली रह गईं।शहज़ादे को सामने पा कर राक्षस भागा ।बिजली की तेज़ी से शहज़ादे की तलवार हवा में कड़की ।अब की बार राक्षस के हाथ पैर नहीं काटे गए बल्कि सीधे राक्षस का सर धड़ से अलग कर दिया गया । शहज़ादे ने उस सुंदर मुख वाली ज़ालिम स्त्री को गौर से देखा और बहुत दुखी मन से अपने आसपास खड़े सैनिकों और साथ आई जीवन देने वाली शहज़ादी से कहा कि माता पिता की आज्ञा के विरुद्ध जाने का अंजाम मैंने देखा है और आप सब मुझसे सबक लो। शहज़ादे ने सैनिकों को सामने खड़ी पाप की शौकीन औरत को पकड़ लेने का हुक्म दिया ।
शहज़ादे ने पिंजरे में बंद शेर के बच्चों को ढूंढा । शेर के बच्चे सूख कर कांटा हुए मरने की कगार पर पहुंच गए थे ।उन्हें साथ लाया गया उनका खाना खिलाया गया । शेर के बच्चे अपने मालिक को देख कर खुशी से उछलने लगे।
शहज़ादे ने सेना को वापस अपने पिता की बादशाहत में चलने को कहा । वोही शहज़ादा जो एक दिन अपनी पत्नी को लेकर रातों रात फरार हो गया था ताकि उसे मौत के मुँह से बचा सके आज कुछ महीनों बाद ही उस रास्ते पर से वापस जा रहा था उसे सज़ा-ए-मौत दिलाने और माता पिता से माफी मांगने । पर इस बार शहज़ादे के साथ उपर वाले का दिया नेक तोहफा शहज़ादी भी साथ थी।
शहज़ादा अपने देश पहुंचा । माता पिता को मानो आँखें मिल गई । शहज़ादे ने माफी मांगते हुए सब हाल कह सुनाया । धूर्त औरत को सज़ा-ए-मौत दी गई । शहज़ादी की नेकी से चारों तरफ खुशहाली छा गई । खोई हुई छः बादशाहतें वापस मिल गई । शहज़ादे को नया बादशाह ऐलान कर दिया गया ।

समाप्त!!

 

नवीन किरण,हिंदी अध्यापिका,करतारपुर,जालंधर

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