सफेद सुन्दरी(कहानी)धारावाहिक–8

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सफेद सुन्दरी(कहानी)धारावाहिक–8

जैसे ही शहज़ादी ने बक्सा खोला तो सबसे पहले उसकी नज़र शहज़ादे के नेक चेहरे पर पड़ी । शहज़ादी की मानो साँस थम गई ।ये क्या जिस लड़की ने कभी किसी पर-पुरुष का चेहरा तक नहीं देखा था आज ये भाग्य ने उसे क्या दिन दिखाया था कि वो एक मर चुके इंसान को देख रही थी । उस अल्लाह की नेक बेटी ने रो कर कहा कि हे सब के मालिक क्या ये आपने मेरा किसी पुरुष की सूरत न देखने का घमण्ड तोड़ा है? जो एक नेक सूरत से मिलाया पर वो ज़िन्दा नहीं है ।शहज़ादी रोती रही और खुदा से फरियाद करती रही।
शहज़ादी ने अपने साथ आई सेविकाओं से कहा कि बक्से से नौजवान का शरीर निकाल कर उसके टुकड़े जोड़े जाएं। सब ने वैसा ही किया । शहज़ादी ने मन ही मन कहा कि मैंने जिस पुरुष का पहली बार चेहरा देखा है वो ही मेरा पति है और अगर मैंने जीवन में कभी किसी का बुरा नहीं सोचा या कभी कोई पाप नहीं किया तो सब को ज़िन्दगी देने वाला मालिक इसे मेरे लिए ज़िन्दा करेगा
शहज़ादी के पिता शहंशाह को जब ये पता चला वो फौरन नदी के किनारे पहुंचे । उन्होंने शहज़ादे के शरीर को महलों में ले जाने का हुक्म दिया ।शहज़ादी लगातार रोये जा रही थी और शहज़ादे के लिए दुआएं किए जा रही थी।
ईश्वर कभी स्वयं मदद के लिए नहीं आते वो किसी न किसी मित्र, गुरू या पीर के रूप में हमारी मदद करते हैं । वही पीर जिन्होंने कभी शहज़ादे के पिता को शहज़ादे की धूर्त पत्नी का असली चेहरा दिखाया था वो शहंशाह के दरबार में पहुंचे । उन्होंने शहज़ादी की तड़प को देखा । बाबा ने कहा हे बेटी ये नौजवान बिना अपना जीवन पूरा किए बेमौत मरा है । तुम अगर अपने नेक कामों के सभी फल इसके लिए दे दो तो हम इसे ज़िन्दा कर सकते हैं । शहज़ादी तुरंत मान गई।
बाबा ने अपने कमंडल से जल लिया और शहज़ादे पर छिड़का। शहज़ादा ऐसे उठ बैठा जैसे सो कर उठा हो।सब और खुशी की लहर दौड़ गई । शहंशाह जो शहज़ादी के विवाह को लेकर फिक्रमंद थे वो खुशी खुशी शहज़ादी की शादी शहज़ादे से करने को मान गए ।

ऊपर वाले ने शहज़ादे और शहज़ादी की एक ऐसी जोड़ी की रचना की जो पूरे समाज और मानवता के लिए सुखद आश्चर्य लेकर आई। दोनों नेकी के दरिया थे जो समस्त संसार के लिए बह रहे थे ।
सब कुछ कितना सुंदर और आकर्षक था। बस एक ही सवाल था जिस का जवाब नहीं मिल रहा था । वो नेक शहज़ादी के मन में और ज़ुबान पर था कि शहज़ादे को मारने की कोशिश किसने की थी? शहज़ादी अक्सर शहज़ादे से पूछती पर शहज़ादे को कुछ याद नहीं आता था । तब शहज़ादी उस अप्रिय रहस्य को जानने की अपनी जिज्ञासा को दबा देती।
दिन बीते शहज़ादा काफी स्वस्थ हो चुका था । शहज़ादे को हर रात एक सपना आता कि एक अतीव सौंदर्य की स्वामिनी सफेद रंग की सुंदरी उसे लाल आँखों से आँसू बहाते हुए कह रही है कि उसकी आँखें बहुत दर्द कर रही हैं और ये तभी ठीक होंगी अगर शहज़ादा उसे शेरनी का दूध लाकर दे। शेरनी के दूध में रूई के फाहे भिगो कर आँखों पर रखने से दुखती लाल आँखें ठीक हो जाएंगी।शहज़ादा जंगल में जाता और जलती आग से शेरनी के पाँच बच्चों को बचाता।सपने में मेहरबान शेरनी दूध के साथ अपने दो बच्चे भी शहज़ादे को भेंट करती।
शहज़ादा आगे सपने में देखता कि अब वो शेर के दो बच्चे बड़े हो गए हैं और पिंजरे में बंद बहुत रो रहे हैं । उनका शरीर सूख कर कांटा हो चुका है और वो शहज़ादे को पुकार रहे हैं । ये स्वप्न शहज़ादे को रोज़ आता और शहज़ादा बेचैन हो उठता।

Continue. ….
नवीन किरण,हिंदी अध्यापिका,करतारपुर,जालंधर

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