प्रिय ना हमको यूँ तड़पाओ(प्रमोद सनाढ्य)

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एक मान मनुहार
प्रिय ना हमको यूँ तड़पाओ
बात जरा तुम मान भी जाओ।
रहो ना ऐसे रूठे रूठे
अब तो प्रीतम हँस भी जाओ।
सावन पूरा प्यासा गुजरा
भादों मे तो ना तरसाओ।
अधरन पर धर अधर पाँखुरी
प्रीतम हिय की प्यास बुझाओ।
नेह नयन भर नयन मिलाओ।
बिन कछु कहे सब कुछ कह जाओ।
घोल प्यार के बोल मधुर तुम
प्रेम सुधा का रस बरसाओ।
मै वृषभान की नवल किशोरी
तुम कान्हाँ बन बंसी बजाओ।
कालिन्दी के तीर साँवरिया
सँग राधिका रास रचाओ।

 

प्रमोद सनाढ़्य “प्रमोद”
राज समन्द

 

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