याद में दिल खो गया (संगीता पाठक)

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गज़ल

याद में दिल खो गया बेकार में।
हाल कुछ ऐसा हुआ है प्यार में।

हार में भी बस लगे है जीत सी,
जीत का कैसा मज़ा दिल हार में।

क्यूँ सताते हो हमें इस हाल में,
उल़झनें ही बढ़ रही तकरार में।

हर खुशी मे ओर ग़म में साथ है,
कोस जग क्यूँ जी रहे संसार में।

बस कह़ीं तो फूल हो कुछ रंग भरे,
पाँव भी रखते रहे हम खार में।

प्यार से रोशन जहाँ संसार हो,
दिल जुडा जब आपके दिल तार में।

गम भुलाने की दवा मिलती किसे,
दर्द को सब झेलते लाचार में।

मैं कफन ओढे फिरा बस शौक में,
मुफ्त मिलता है इसी बाजार में।

है नहीं घाटा मुनाफा प्यार में,
खूब सौदा गर मिलें व्यापार में।

जब विधाता सा लगे महबूब भी,
प्यार को पावन करो आभार में।

हर तरफ मन मोर सा नाचे फिरें,
झूम जाता है उसी सत्कार में।

बाँसुरी मन में बजी मंगल मधुर,
कृष्ण राधा ही रहे इस सार मे।

भाग से मिलती है सबको ये घड़ी,
पा गया जो फिर नही मझधार में।

राधिका का सब्र ही जड़ मूल है,
देख लो कब से खडी इन्त जार में।

संगीता पाठक,सहारनपुर

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