तेरी नजर ने(डॉ.यास्मीन खान)

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ग़ज़ल

शहर में हलचल मचा दी इस ख़बर ने।
मार डाला हमको तो तेरी नज़र ने।।

चौंककर सारा ज़माना रह गया है।
रूप आदम का लिया बूढ़े शजर ने।।

खिलखिलाकर हँस पड़े मंज़िल पे आकर।
पैरों में छाले दिए थे जो सफ़र ने।।

बात आखिर ऐसी भी क्या हो गयी है ?
ख़ौफ़ सा ओढ़ा हुआ है हर बशर ने।।

हमसे भी हैं सख़्त दिल कुछ लोग जग में।
चीख कर मुझसे कहा हर इक हज़र ने।।

आपने उतनी मुहब्बत की तो होती।
खाये हैं जितने कि पत्थर मेरे सर ने।।

जानते हैं आज़माइश सख़्त होगी।
फिर बुलाया है मुहब्बत के नगर ने।।

यासमीं बेनूर होने कब दिया है।
इश्क़ का चेहरा वफ़ाओं के असर ने।।
शजर-पेड़,बशर-इन्सां, हज़र-पत्थर
डॉ.यासमीन ख़ान ,मेरठ 

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