इस जीवन में (शिवांगी दीक्षित)

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गीत

संघर्षो के इस जीवन में
गिरती और संभलती हूँ।
जितनी बार बिखरती हूँ मैं
उतना और निखरती हूँ।।

तोड़ दिए थे रिश्ते नाते
जब भी मेरे अपनो ने।
मेरी हिम्मत बनकर आये
खुद ईश्वर जी सपनो में।
हार न मानी मैंने जग से
दर्द हज़ारों सहती हूँ…।
संघर्षो के………।।

लड़की हो, समझाकर मुझको
कदमो को मेरे रोका।
इस समाज का डर दिखलाकर
हर पग पर मुझको टोका।।
रुक सकती मैं कभी न पथ पर
साथ हवा के उड़ती हूँ…..।
संघर्षो…………।।

शिवांगी दीक्षित
बी.ए. (तृतीय वर्ष)
तुर्की, इटौंजा, लखनऊ

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