ये कैसा संसार !!( राजकुमार ‘राज’)

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कुछ बातें बकरीद की!!

ईद के शब्दी मायने हैं “खुशी”..आज ईद उल जुहा है..जिसमे आज हज़ारो जीवों की कुर्बानियां होंगी और भयंकर चीखो पुकार उठेगी..आइये कुछ बात करें कि आखिर इस प्रथा य त्योहार की जड़ें कहाँ से शुरू होती है….. हज़रत इब्राहीम बहुत वरिष्ठ नबी माने जाते हैं कि वे कई नबियों से पहले आए तथा उनके बाद कई पीढ़ियों तक इनके ख़ानदान में नबियों के आने का सिलसिला चलता रहा। इन्हीं के ख़ानदान में हज़रत मूसा, हज़रत ईसा और हज़रत मुहम्मद जैसे नबी पैदा हुए। इन नबियों को मानने वालों में क्रमशः यहूदी, ईसाई और मुसलमान हैं। इस तरह ये तीनों क़ौमें हज़रत इब्राहीम को समान रूप से अपना नबी मानती हैं।….हज़रत इब्राहीम को पक्के तौर पर बहुत बड़े उपासक रहे होंगे और अध्यात्म का गहन ज्ञान रखने वाले होंगे..हमारी पुरातन संस्कृति को देखें तो हरिश्चंद्र की गाथा। सत्य की राह पर चलने वाले हरिश्चंद्र को कई परीक्षाओं से गुजारती नज़र आती है…यही बात हज़रत इब्राहीम के साथ भी देखने को मिलती है कि एक बार आपको सपने में ईश्वर के दर्शन हुए और आपसे आपकी किसी सबसे प्रिय वस्तु या व्यक्ति का त्याग या कुर्बानी मांगी गई..हज़रत अपने बेटे इस्माइल से बेहद प्यार करते थे और उन्होंने अल्लाह की इस परीक्षा में बेटे को कुर्बान करने का मन बना लिया..हज़रत जैसे ही अपने बेटे इस्माइल की गर्दन पर छुरी चलाकर उसे हलाल करने लगे..तभी अल्लाह का चमत्कार हुआ और इस्माइल की गर्दन की जगह बकरे की गर्दन इनके आगे कर दी गयी और इस्माइल बच गया..इस तरह इस परीक्षा में हज़रत इब्राहिम पास हुए और यह त्योहार अस्तित्व में आया और बकरे की कुर्बानी की प्रथा भी साथ जुड़ गई ।
दोस्तो ! हज़रत हज़रत इब्राहीम से जुड़ा वो प्रसंग एक संदेश है…एक साधक मंजिल तक पहुंचा और उसे पूछा गया कि द्वार तब खुलेंगे जब आखरी मोह और वो भी सबसे प्रिय मोह अगर त्याग सकते हो तो मोक्ष सामने खड़ा है…आध्यात्मिक कुर्बानी में किसी जीव को नही अंदर छिपी सबसे बड़ी वासना की कुर्बानी होती है..इसी का एक हिस्सा मोह है..जिसके तहत हज़रत ने अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने का मन बनाया और वह ईश्वर की हजूरी में परवान हुए….इतनी सरल और प्रेरणा से भरी बात को ना जाने समझा क्यो नही गया और अगर समझा गया तो इतने बुद्धिजीविओं ने ना जाने इसका प्रचार क्यों नही किया कि….अल्लाह चीखो-पुकार से नही ,अमन और संगीत से प्रसन्न होता है..तभी तो कुरान की आयतें इतनी मीठी है..

बकरा कटा बकरीद का
करता रहा पुकार…
अल्लाह तेरे बन्दों का
ये कैसा संसार..
खुद की बलि को छोड़कर
मुझपर छुरी चलाएं..
मेरी पीड़ा मेरे आंसू
क्या ये देख न पाएं…
“अल्लाह” तेरे दरबार में
अमन का कारोबार..
ये कैसा अध्यात्म है
जिसमे चीख-पुकार..

राजकुमार राज,शिक्षक,अमृतसर
मो—9592968886

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2 COMMENTS

  1. ‘ ये कैसा संसार ‘आलेख में संक्षिप्त में राजकुमार जी ने ईद से संबंधित पुख्ता जानकारी साझा की । जो वाकई मः हमारी भ्रांति को तोड़ती है ।
    ईद मुबारक ।

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