सफेद सुन्दरी (कहानी) धारावाहिक–7

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सफेद सुन्दरी( कहानी ) धारावाहिक–7

चिट्ठी कुत्ते के गले से बाँध दी गई और उसे आज़ाद कर दिया गया । कुत्ता दौड़ता हुआ अपने प्यारे मालिक लकड़हारे के पास पहुंचा । जब कुत्ता लकड़हारे के सामने पहुंचा तब लकड़हारा लकड़ी की चारपाई के पाये बना रहा था।जैसे ही उसने कुत्ते को देखा तो लकड़हारे ने समझा कि कुत्ता अपने नए मालिक को छोड़ कर भाग आया है। लकड़हारा जो पाया बना रहा था उसने गुस्से में वही उठाया और दूर से फेंक कर कुत्ते के मारा। पाया सीधे कुत्ते के सर में लगा और वहीं पर कुत्ता ढेर हो गया।लकड़हारा भाग कर आया और उसने मर चुके कुत्ते को देखा। कुत्ते के गले से चिट्ठी बंधी थी । लकड़हारे ने चिट्ठी पढ़ी और सर पकड़ कर रोने लगा और बहुत पछताया ।
शहज़ादे ने कपटी औरत से कहा कि मुझे मार कर तुम वैसे ही पछताओगी जैसे लकड़हारा अपने वफादार कुत्ते को मारकर पछताया था ।
पर जिसकी अक्ल पर पाप का पर्दा पड़ा हो वो कब किसी की सुनता है ।निर्दयी औरत ने शहज़ादे की एक भी दलील नहीं सुनी और शहज़ादे की ही तेज़ धार तलवार से उसे मौत के घाट उतार दिया । यही नहीं उस मक्कार स्त्री ने बिना किसी दया के शहज़ादे के सुंदर शरीर के टुकड़े टुकड़े करके एक लोहे के बक्से में डाल दिये ।राक्षस ने बक्सा सर पर उठाया और उसे ले जा कर नदी में बहा दिया ।
अगर शहज़ादे की मौत के साथ बदी की जीत हुई तो ये मत भूलो कि जीत अंत में नेकी की ही होती है । शहज़ादे की जीत होगी ये सबको इंतज़ार था , उस नदी को जो बक्स को बहाए लिए जा रही थी और दो जानवरों की रूहों को भी जिन्हें शहज़ादा आग से बचा कर अपने साथ घर ले आया था जब वो अपनी धूर्त पत्नी के लिए शेरनी का दूध लेने गया था । शेर के दो बच्चे जो शहज़ादे के पालतू थे शहज़ादे की मौत का भयानक मंज़र देख रहे।शहज़ादा अवश्य लौट कर आएगा बस देखना ये है कि नेक दिल लोगों को कितना इंतज़ार करना होगा ।

अगर संसार में बुरे लोग हैं तो अच्छे लोग भी हैं अंधैरा है तो उजाला भी है ।जुल्म हैं तो रहम भी है । छल कपट है तो सादगी और नेकी भी है ।
पानी से भरी नदी में बड़ा सा बक्सा तैरता जा रहा था । उधर दूर कहीं किसी देश की नेक रूह शहज़ादी सुबह के तीन बजे मुंह-अंधेरे अपनी परिचारिकाओं के साथ नदी पर स्नान करने पहुंची थी। शहज़ादी अल्लाह को मानने वाली नेकी की मिसाल थी।
शहज़ादी ने प्रण किया था कि वो कभी शादी नहीं करेगी और कुंवारी रह उस रब की इबादत करते हुए ताउम्र लोकसेवा करेगी। इसलिए उसने ये भी क़सम खाई थी कि वो कभी किसी पर पुरुष की सूरत नहीं देखेगी। यही कारण था कि वो अंधेरे में अलसुबह महलों से निकलती और नदी पर स्नान के लिए आती।
उस दिन स्नान करने के बाद शहज़ादी महलों की तरफ जाने ही वाली थी। आकाश पर सूबह की हल्की नीली रौशनी फैल रही थी जब शहज़ादी ने नदी पर तैरता वो बक्सा देखा जिसमें शहज़ादे की लाश थी।शहज़ादी शांत स्वभाव लड़की थी ।पर उस दिन उस बक्से को देख कर जाने क्यूँ उसका मन बच्चों की तरह बेचैन हो गया।शहज़ादी को लगा कि इस बक्से में कुछ ऐसा है जो मेरा भाग्य है।
शहज़ादी ने खुद तैर कर वो बक्सा नदी में से बाहर निकाल लिया । शहज़ादी की सेविकाओं ने शहज़ादी की मदद की उसे खींच कर बाहर लाने और खोलने में ।

Continue. ….


नवीन किरण,हिंदी अध्यापिका,करतारपुर,जालंधर

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