महामानव बनकर आ जाओ तुम!!(Dr.Purnima Rai)

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महामानव बनकर आ जाओ तुम!!

दिन ढला और रात बीती
बीत चली यौवन दुपहरी।
बादलों में नभ के रवि ने
खींच दी किरणें सुनहरी।।

फूल पत्तियाँ कसमसायी।
लहर भी बल खाती आयी।।
आवेग औ’ उन्माद के पल,
तीव्र भीषण आँधी आयी।।

आज हर एक साँस व्याकुल।
प्राण निश्चल दिल ये घायल।।
विरह व्यथा की पीर अद्भुत,
या खुदा के हम थे कायल।।

सर्प निसदिन घूम रहे हैं।
“पूर्णिमा” भूमि डस रहे हैं।।
बेखबर है भोली जनता,
प्रपंच रचकर छल रहे हैं।।

बेबसी में चूर हो कर
आँखों से बेनूर होकर
कर रहे सब इन्तजार हैं
महामानव बनकर आ जाओ तुम
महामानव बनकर आ जाओ तुम!!

Dr.Purnima Rai,Asr

डॉ.पूर्णिमा राय,
अमृतसर(पंजाब)

drpurnima01.dpr@gmail.com

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