इस दिल में (सबिहा परवीन)

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गज़ल

तुम्हारी याद को हमने सजा रक्खा है इस दिल मेंं
 खुदा से मांग कर तुमको बसा रक्खा है इस दिल में ।।
तुम्हीं तुम मेरे अंदर हो तुम्हीं तुम मेरे बाहर हो
निगाहों से तुम्हें सबकी छिपा रक्खा है इस दिल में।
ये किस्मत ही तो है मेरी बने हो तुम मेरे हमदम
हमेशा के लिये अपना बना रखा है इस दिल मेंं ।
तुम्हारा ही दिवाना हूँ भुला देना न तुम मुझको
तुम्हारे अक्स को मैंने बिठा रखा है इस दिल में।।
तेरी जुल्फों के साये से हँसी मंज़र भी क्या होगा ;
तेरी चाहत के दरिया को बहा रखा है इस दिल में।

सबिहा परवीन
इटौंजा, लखनऊ

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