सफेद सुन्दरी(कहानी)धारावाहिक–6

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सफेद सुन्दरी( कहानी ) धारावाहिक–6

शाम को जब शहज़ादा घर आया तब कपटी औरत ने उसे खाने में कोई तेज़ नशीला पदार्थ खिला दिया । जब शहज़ादा अर्ध बेहोश और लाचार हो गया तब वो धोखेबाज़ औरत तलवार तान कर शहज़ादे को मार देने के लिए उसके सर पर सवार हो गई ।
शहज़ादे ने हैरानी से देखा और सारा मामला समझ गया।उसे अपने माता पिता का फैसला अब सही लगने लगा था।शहज़ादे ने छल कपट से भरी उस स्त्री को समझाने की एक कोशिश की । शहज़ादे ने कहा तुम मुझे मार कर वैसे ही पछताओगी जैसे राजा अपने पालतू बाज़ को मार कर पछताया था। वो बोली कि तुम्हे मारने से पहले मैं सुनना चाहूंगी कि राजा बाज़ को मारकर क्यों पछताया था ।
शहज़ादे ने किस्सा शुरू किया । एक राजा के पास एक पालतू बाज़ था ।जिसे वो युद्ध में साथ लेकर जाता था । एक बार राजा युद्ध में बुरी तरह हार गया। राजा अकेला रह गया । उसके साथ सिर्फ उसका बाज़ था। सख्त गर्मियों के दिन थे। राजा के पास न खाना और न ही पानी था।राजा प्यास से तड़प रहा था ।वो एक पेड़ के नीचे बेबस लाचार बैठा था। तभी राजा का ध्यान गया कि पेड़ से टप टप पानी टपक रहा है । राजा ने आव देखा न ताव अपनी ढाल को प्याले की तरह टपक रहे पानी के नीचे रख दिया ।जब ढाल में पीने जितना पर्याप्त मात्रा में पानी भर गया तब राजा ने ढाल को उठा कर मुंह से लगाना ही चाहा था कि बाज़ बिजली की गति से झपटा और ढाल को ज़मीन पर गिरा दिया । राजा बाज़ की हरकत पर बहुत निराश हुआ ।पक्षी को डांटने के बाद राजा ने पुनः पानी भरना शुरू किया । जैसे ही पानी भर गया बाज़ ने फिर पानी गिरा दिया । ऐसा जब तीन बार हो चुका तो प्यासे और बदहाल राजा के सब्र का बांध टूट गया । व्याकुल और व्यथित राजा ने तलवार उठाई और एक झटके में बाज़ का काम तमाम कर दिया । अब राजा ने इत्मीनान से फिर पानी भरना शुरू किया । तभी कुछ अजीब सी आवाज़ सुनाई दी ।राजा ने अब ऊपर की ओर देखा । राजा के पसीने छूट गए ये देख कर कि एक भयानक अजगर मुंह खोले पेड़ पर लिपटा है और जो पानी समझ कर राजा पीने के लिए इकट्ठा कर रहा था वो पानी नहीं बल्कि उसके मुँह से टपकता ज़हर था । अब राजा सर पकड़ कर अपने वफादार बाज़ के लिए रोने लगा और पछताने लगा ।
किस्सा ख़त्म कर के शहज़ादे ने उस धूर्त औरत से कहा कि तू भी मुझे मार कर ऐसे ही पछताएगी जैसे राजा अपने पालतू बाज़ को मार कर पछताया था।

छल कपट की मिट्टी से बनी वो निर्दय स्त्री मात्र एक कथा से कहाँ मानने वाली थी । उसने कुटिल हंसी हंसते हुए कहा ,” नहीं मैं नहीं पछताऊंगी।” जैसे ही उसने शहज़ादे को मारने के लिए तलवार उठाई शहज़ादे ने फिर कहा कि तुम मुझे मार कर वैसे ही पछताओगी जैसे लकड़हारा अपने वफादार कुत्ते को मारकर पछताया था ।
रात काफी बाकी थी। औरत को विश्वास था वो उसे मार ही देगी तो उसने फिर पूछा ,” वो कैसे? “
शहज़ादे ने एक और किस्सा शुरू किया । एक लकड़हारा था उसका एक वफादार कुत्ता था।लकड़हारा कुत्ते से बहुत प्यार करता था। लकड़हारा उसे जैसे भी ग़रीबी में रूखा सूखा खिला कर रखता वो खुशी से अपने मालिक के कदमों में पड़ा रहता।एक बार लकड़हारे ने एक साहूकार का कुछ कर्ज़ चुकाना था पर लकड़हारा इतना ग़रीब था कि कर्ज़ न चुका सका। जब साहूकार वसूली के लिए आया तो लकड़हारे ने मजबूर हो कर कहा कि उसके पास एक अच्छी नस्ल का कुत्ता है अगर साहूकार चाहे तो कर्ज़ के बदले कुत्ते को ले जाए।जब साहूकार कुत्ते को अपने गांव ले जाने लगा तो कुत्ता बहुत रोया और उसने विरोध भी किया । जब लकड़हारे ने कुत्ते को डांटा तो कुत्ता अपने मालिक की इच्छा को समझ गया और साहूकार के साथ चला गया ।इत्तेफाकन उसी रात साहूकार के घर बड़ा डाका पड़ा। डाकुओं ने सब को बंधक बना कर सारी तिजोरियां लूट ली।कुत्ते की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया क्योंकि साहूकार उसी दिन कुत्ते को लाया था और किसी को ख़बर नहीं थी कि साहूकार के घर कोई पालतू कुत्ता भी है। डाकू जब सब कुछ लूट कर जाने लगे तो कुत्ता उनके पीछे चल दिया । दूर जंगल में जाकर डाकुओं ने सारा धन एक गड्ढे में दबा दिया और सब अलग अलग दिशाओं में चले गए । कुत्ते ने उस जगह पर पंजों से निशान बनाए और सूंघते सूंघते साहूकार के घर वापस आ गया। दिन चढ़ आया था सारा गांव साहूकार के घर इकट्ठा हो चुका था । कुत्ते ने जाकर साहूकार की धोती खिंची, साहूकार ने ध्यान नहीं दिया ।कुत्ता बार बार ऐसा करने लगा ।एक स्याने बुजुर्ग ने कहा कि कुत्ता कुछ कहना चाहता है इसकी बात समझो।

कुत्ता आगे आगे चल दिया सारा गाँव उसके पीछे पीछे था। जंगल में जाकर कुत्ता एक जगह रुका।वहां ताज़ी मिट्टी डालकर गड्ढा भरा गया था। जब वहां खोदा गया तो साहूकार के जीवन भर की पूंजी उसे वापस मिल गई । साहूकार बहुत प्रसन्न हो गया । साहूकार ने कुत्ते को लकड़हारे को छोड़ कर आते समय रोते हुए देखा था ।इसलिए साहूकार ने इनाम स्वरूप कुत्ते को उसके मालिक के पास वापिस भेजने की सोची। साहूकार ने एक चिट्ठी लिखी जिसमें लकड़हारे को लिखा कि उसका कर्ज़ इस वफादार कुत्ते ने अदा कर दिया है इसलिए इसे मैं तुम्हें वापिस कर रहा हूं । साहूकार ने चिट्ठी में डाके वाली घटना का वर्णन किया ।

Continue. ….
नवीन किरण,हिंदी अध्यापिका,करतारपुर,जालंधर

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