सफेद सुन्दरी( कहानी ) धारावाहिक–5

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सफेद सुन्दरी( कहानी ) धारावाहिक–5

शहज़ादे की धोखेबाज़ पत्नी ने कहा कि “राक्षस तुम्हारी बाहें और टाँगे शहज़ादे ने काट दी हैं इसलिए तुम चट्टान नहीं हटा सकते हो और मैं इतनी ताकतवर नहीं हूँ कि चट्टान को ज़रा भी खिसका सकूं ।” राक्षस ने नम्र बोल सुन कर कहा ” हे देवी तुम चाहो तो मेरी मदद कर सकती हो।” आगे राक्षस ने बताया कि वो जिस कुएँ में रहता था वहाँ एक पौधा है जिसकी निशानी है कि उसको पाँच अलग अलग रंगों के फूल लगे हैं।अगर शहज़ादे की पत्नी उस पौधे के पाँच फूल तोड़ कर लाए और उन्हें पीस कर उनका मलहम बना कर राक्षस के कटे अंगों पर लगा दे तो वो अंग पुनः प्रकट हो जाएंगे ।शहज़ादे की पत्नी ने कहा कि “ठीक होकर तुम आज़ाद होते ही मुझे खा जाओगे” राक्षस ने वादा किया कि “हे देवी! मैं तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाउंगा और तुम्हारे बहुत काम भी आऊंगा ।”
मूर्ख स्त्री ने सिर्फ अपनी पापी वृत्ति की तुष्टि के लिए वो करने की ठानी जो कोई सोच भी नहीं सकता था । उसने शहज़ादे की उन सब नेकियों को भुला दिया जो उसने उसके साथ की थी । अपने माता पिता के फैसले के खिलाफ जाकर शहज़ादे ने जो उसका साथ देने का गलत निर्णय लिया था वो निर्णय आज शहज़ादे को जीवन भर का सबक सिखाने वाला था ।
नौजवान पापिन स्त्री ने कुएँ से पांच फूल लाकर मलहम बनाया और राक्षस को बिल्कुल ठीक कर दिया । राक्षस ने चट्टान को एक झटके में अपने ऊपर से हटा दिया और आज़ाद हो गया ।
राक्षस ने अपने जैसे स्वभाव वाली उस स्त्री को हैरानी से पूछा कि “तुमने मेरी मदद क्यों की?” शहज़ादे की पत्नी ने कपटी मुस्कान के साथ कहा कि” ये तुम जल्दी ही समझ जाओगे ।”

शहज़ादे की पत्नी ने राक्षस को आज़ाद तो कर दिया पर राक्षस के मन में शहज़ादे का डर कुंडली मार कर बैठ गया था। राक्षस ने शहज़ादे की पत्नी से कहा कि मुझे तुम्हारे पति से बहुत डर लगता है इसलिए जब वो घर आए तो मुझे इस कमरे में बंद कर दिया करना और मैं हाए हाए करता रहूंगा ऐसे शहज़ादे को शक नहीं होगा।
ऐसे बहुत दिन बीत गए ।शहज़ादे की धूर्त पत्नी ने सोचा कि इस तरह तो वो राक्षस से कोई भी मन माफिक पाप कर्म नहीं करवा सकेगी तो उसने राक्षस से बात की । राक्षस ने कहा कि इसका एक ही हल है कि क्यों न शहज़ादे को सदा की नींद सुला दिया जाए।
नियति का खेल देख कर समय ठहर गया । जीवन देने वाले को मौत देने जा रही थी वो नाशुक्रगुज़ार स्त्री ।
राक्षस ने शहज़ादे की पत्नी को बहुत से मुश्किल काम बताए जिन्हें करने में शहज़ादे की जान जा सकती थी ।जैसे शेरनी का दूध लाना, जैसे कोई ऐसा फल तोड़ कर लाना जो राक्षसों के देश में मिलता हो। शहज़ादे की पत्नी ने अपनी जान जाने का डर दिखाकर शहज़ादे से सब मुश्किल काम करवाए।
राक्षस और उस औरत को हैरानी तब हुई जब शहज़ादे ने आराम से अपनी बहादुरी के दम पर हर काम आसानी से कर दिखाया ।
उस ज़ालिम औरत के सब्र का बांध टूट गया और उसने शहज़ादे को कोई नशीली वस्तु खिला कर मार देने की योजना बनाई ।

Continue. ….

नवीन किरण,हिंदी अध्यापिका,करतारपुर,जालंधर

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