छन्द,छन्दोभेद एवं मात्रिक छंद(दोहा,सोरठा,रोला,कुण्डलियाँ,गीतिका छन्द ) Dr.Purnima Rai

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छन्द परिचय,छन्दोभेद एवं मात्रिक छंद(दोहा,सोरठा,रोला,कुण्डलियाँ,गीतिका छन्द ) Dr.Purnima Rai

1) —छन्द—   छन्द में अक्षर( वर्ण) यां मात्राओं तथा,यति,गति का विशेष नियम होता है ।
—छन्दोबद्ध रचना पद्य एवं छन्दरहित गद्य कहलाती है।
–अक्षर/वर्ण–इसमें स्वर यां स्वररहित व्यंजन आते हैं।

मात्रा—अक्षरों के उच्चारण में जो समय लगता है,उसे मात्रा कहते हैं।

—-अ,इ,उ,ऋ इन स्वरों का उच्चारण
ह्रस्व होता है।इनको एक मात्रा कहेंगे।

—-आ ई ऊ ए ऐ ओ औ—दीर्घ स्वर हैं ।दो मात्रा गिनी जायेगी।

—स्वररहित व्यंजनों की मात्रा अर्ध होती है पर छन्दशास्त्र में इसे गिना नही जाता।जैसे— क् र् म् प् इत्यादि (हलन्त वाले व्यंजन)

यति–छन्दों के उच्चारण में ठहराव को यति यां विराम कहते हैं।

2) छन्दोभेद—वैदिक एवं लौकिक

क) —-वैदिक छन्द —–सात हैं—-गायत्री,उष्णिक,अनुष्टुप,बृहती,पंक्ति,त्रिष्टुप,जगती

ख)—–लौकिक छंद—–
मात्रिक और वर्णिक दो तरह के होते हैं।

—-मात्रिक छंद में मात्राओं की गणना होती है ।इन्हें “वृत्त “भी कहा जाता है।
जैसे–राम आता है । यहाँ वाक्य में
रा =2, म =1 ,आ=2 , ता=2 , है=2 ,कुल 9 मात्रायें हैं।

—–वर्णिक छंद में वर्णों की गणना होती है ।इन्हें ‘जाति’ भी कहा जाता है।
जैसे –राम आता है यहाँ वाक्य में र ,म,अ,त =चार वर्ण हैं।

3) मात्रिक छंद —-परिचय ,विधान एवं उदाहरण
—-मात्रिक छंद में मात्राओं की गणना की जाती है ।

—विभिन्न मात्रिक छन्द—-

क) दोहा छंद

–दोहा छंद- अर्द्ध सम मात्रिक छंद है।
इस छंद के विषम चरणों (प्रथम एवं तृतीय)में 13–13मात्रायें एवं सम चरणों (द्वितीय एवं चतुर्थ) में 11-11मात्रायें होती है। सम चरणों के अंत में गुरु और लघु यानि 21 मात्रा का विधान अनिवार्य है।विषम चरणों में यति से पहले वाला वर्ण क्रम लघु गुरु यानि 12 अनिवार्य है।

उदाहरण—१*

2 2    22    2 12,   1111  2     221
भीनी खुश्बू से भरी, प्रियवर की मुस्कान।(13–11)

21  122     21    2    22 11 1121
देख सलोने श्याम को,जागे मन अरमान।। (13–11)

उदाहरण——2*

वाणी ही पहचान है, वाणी में रस घोल।
सुन्दर भावों से सजे, मुख से निकलें बोल।।

उदाहरण—३*

देह बावरी प्रेम में,सदा रहे बेचैन
हरि दर्शन से ही सदा,रूहें पायें चैन।।

उदाहरण—४*

जीवन गाथा एक है,और सुहाना गीत।
ईश कृपा से ही सदा,निभ सकती है प्रीत।।

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ख) सोरठा—-
सम तेरह विषमेश दोहा उलटे सोरठा

दोहा को उलटने से सोरठा बन जाता है ।
अर्थात दूसरी– चौथी में 13 मात्रायें एवं पहली— तीसरी में 11 मात्रायें होती है।
उदाहरण—-१*

11 211 2 21, 112 11 22 12
हिय कोमल है भाव, अधरों पर हंसी खिले।
211 12 121 111 21 22 12
ओझल सभी अभाव, परम मित्र कान्हा मिले।।

उदाहरण–२*

पावन महके अंग,बिछुडे जब दोस्त मिले।
कृष्ण सुदामा संग,जीवन बाग फूल खिले।।

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ग) रोला छन्द–
इस छन्द में 24 मात्रायें होती है।
पहले और तीसरे चरण में 11 एवं दूसरे और चौथे में 13 मात्रायें होती हैं। चरणान्त में दीर्घ मात्रा होना अनिवार्य है।

11  2    22   21,    212    211 22
जग की झूठी प्रीत, कामिनी चंचल माया।
22    2    11 21 ,  12   11   22     22
काहे का अभिमान, मिटे यह सुंदर काया 

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घ) कुण्डलियाँ छन्द—
यह विषम मात्रिक छन्द दोहा और रोला के योग से बनता है। इसमें पहले दो पद (पंक्तियाँ=चार चरण) दोहे(13+11=24) के होते हैं।पुन: चार पद रोला ( 11+13=24मात्रा) के होते हैं।दोहे का चौथा चरण यानि सम चरण रोला के आरंभ में लगता है। कुण्डलियाँ का अन्त दोहे के आरंभिक शब्द यां प्रथम चरण में प्रयुक्त शब्दों से होता है।

उदाहरण–*१
1)
चोरी-चोरी हो गया ,हमको तुमसे प्यार।
हर पल अब होने लगा,भावों का विस्तार (दोहा)

भावों का विस्तार,नयन यह राह निहारे।
गर्मी-सर्दी धूप,तन-मन को ही सँवारे।।(रोला)

कहे ‘पूर्णिमा’ आज,शिव संग सजती गौरी
प्राणनाथ में साँस,दिल की हो गई चोरी।। (रोला)
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उदाहरण-*2 

हालत देख किसान की,नेत्र बहाते नीर।
खाने के लाले पड़े ,नहीं बदन पर चीर।।
नहीं बदन पर चीर, हुई चमड़ी है काली।
सहता है वह दुःख ,देखकर मटके खाली 
बरसेंगे जब मेघ,मिलेगी तब ही राहत।
मनभावन बरसात,सुधारेगी ये हालत।।

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ड)गीतिका छंद–

इस छन्द के प्रत्येक पाद(चरण )में 26 मात्रायें और 14-12 पर यति होती है।इस छन्द के अन्त में लघु गुरु क्रम होना अनिवार्य है।

उदाहरण–
11 12 11 2 122,      21   11 22   12
जब वफा करने लगेंगे ,प्रीत महकेगी तभी 
21 2 11 212 2,      21 11 2 2     12
मान दें हम दूसरों को,जीत चहकेगी तभी।

 उदाहरण–*2
हर बशर सुख चाहता है ,सुख मगर मिलता नहीं।
दूर कर लें खामियों को, दुख कभी टिकता नहीं।।

**आसान शब्दों में कहें तो 2122 2122 , 2122 212 इस आधार पर बिना मात्रपतन लिये गीतिका छंद आसानी से लिखा जा सकता है।

–ये थी जानकारी कुछ विशेष मात्रिक छन्दों की …शेष फिर कभी…जुड़े रहे हमारे साथ!!

आप अपने सुझाव अवश्य दें…यां जो जानकारी आप पाना चाहते हैं..कमेंट बाक्स में कह सकते.हैं…
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डॉ.पूर्णिमा राय,शिक्षिका एवं लेखिका,अमृतसर(पंजाब)

drpurnima01.dpr@gmail.com

 

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6 COMMENTS

  1. बहुत अच्छी जानकारी सरल सहज रूप में बहुत उम्दा बधाई प्रिय पूर्णिमा जी

  2. पावन महके अंग,बिछुडे जब दोस्त मिले।
    कृष्ण सुदामा संग,जीवन बाग फूल खिले।।

  3. पावन महके अंग,बिछुडे जब दोस्त मिले।
    कृष्ण सुदामा संग,जीवन बाग फूल खिले।।

    please iski matraye lagakar dijiye, sir….

  4. पावन महके अंग,बिछुडे जब दोस्त मिले।
    कृष्ण सुदामा संग,जीवन बाग फूल खिले।।

    please iski matraye lagakar dijiye sir

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