सफेद सुन्दरी (कहानी)धारावाहिक-3

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सफेद सुन्दरी (कहानी)धारावाहिक-3

अमावस्या की वो ऐसी रात थी जब साया भी अपना साथ छोड़ जाता है और ऐसी रात को शहज़ादा उस धोख़े की मिट्टी से बनी सुनहरी मूरत का साया बन कर साथ दे रहा था । आकाश के लहराते तारों के दामन ने धरती के शबनमी आँसू पोंछ कर मानो इस अनहोनी को सहने की हिम्मत बंधाई। सब जानते थे सब समझते थे अगर कोई अनजान था तो वो था जाँबाज़ शहज़ादा कि वो जिसे दुखियारी समझ कर मौत के मुँह से निकाल कर लिए जा रहा था एक दिन वो उसे ही मौत के मुँह में धकेलेगी।
शहज़ादा अपने सफेद घोड़े पर सवार होकर अपनी पत्नी को लेकर उड़ता जा रहा था । घोड़ा हवा से बातें कर रहा था । शहज़ादा जल्द से जल्द अपनी पत्नी को सज़ा-ए-मौत के फैसले से दूर बहुत दूर ले जाना चाहता था ।सैंकड़ों देशों को पार कर सात समंदरों को पार कर शहज़ादा और उसकी पत्नी एक ऐसे देश पहुंचे जहाँ के हालात देख कर दोनों दंग रह गए ।

उस देश के सारे शहर सारे गांव विरान पड़े थे। घर बने हुए थे पर उनमें कोई नहीं रहता था ।रास्ते विरान थे। बाज़ार सजे थे,न उनमें ग्राहक थे न दुकानदार। बाग बगीचे सब खाली थे। कहीं कोई जीवित इन्सान नहीं दिखाई दे रहा था ।परंतु शहरों की स्थिति व व्यवस्था बताती थी कि कभी ये शहर भरे पूरे थे ,लोग वहाँ रहते थे ज़िन्दगी वहां धड़कती होगी ।
शहज़ादा और उसकी पत्नी हैरान थे कि आखिर वहां रहने वाले गए कहाँ? ये पूरा देश विरान क्यों है ? दोनों ने हाट बाज़ार घूमे जिन वस्तुओं की उन्हें ज़रूरत थी वो उन्होंने दुकानों से ले ली।उन्हें अजीब लग रहा था। कीमती से कीमती वस्तुएं बिना किसी अहतियात के रखी थी ।
दोनों खाने का सामान लेकर एक घर में चले गए उन्होंने खाना पकाया और खाया। शहज़ादे के दिमाग़ को चैन नहीं पड़ रहा था वो बेचैनी से उस देश के हालात पर विचार कर रहा था । जाँबाज़ बहादुर शहज़ादे को बहुत जल्दी उसके सब सवालों के जवाब मिलने वाले थे।

उस विरान देश में दोनों पति पत्नी को शाम हो गई । ख़तरे का अहसास शहज़ादे को हो रहा था वो उससे निपटने को तैयार भी था पर ख़तरा कैसा होगा ये वो समझ नहीं पा रहा था ।
अब वो आया जिस पर नियति कुटिल हंसी हंस रही थी । वो आया जो शहज़ादे की आँखों पर पड़ा सुंदरता के मोह का पर्दा उठा देगा। वो बहुत विशाल था डरावना था बलशाली था। उसे देख कर कोई भी इंसान समझ जाता कि अब जीवित रहना नामुमकिन है । वो लाल और काले रंग के डरावने चेहरे वाला बड़ी बड़ी आँखों वाला बड़े बड़े दाँतों वाला।वो धरती पर पैर रखता तो एक कंपन दूर तक फैल जाती । उसके आने से पहले ही उसकी आमद का पता चल जाता था। वो जब आया तो शिकार करके आया था । जैसे ही उसने विरान देश में क़दम रखा उसे एक जानी पहचानी इंसान की गंध आई। वो हैरान हुआ कि जिस देश के सभी इंसानों को वो खा कर जड़ से ख़त्म कर चुका था वहाँ इंसान की गंध कहाँ से आ रही थी ।वो दहाड़ा आदम-बू आदम-बू , किधर और कहाँ से आ रही है ये आदम- बू ?????
उसकी आवाज़ से धरती काँप उठी आकाश थरथरा गया। वो पागलों की तरह इंसान की गंध की तरफ बढ़ रहा था । जैसे जैसे वो शहज़ादे और उसकी पत्नी की तरफ बढ़ रहा था उसकी आवाज़ तेज़ होती जा रही थी ।
उधर चौकन्ने शहज़ादे को महसूस हुआ कि कोई भयानक आवाज़ उनकी तरफ आदम- बू आदम-बू करती बढ़ रही थी ।

Continue. ….


नवीन किरण,हिंदी अध्यापिका,करतारपुर,जालंधर

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