सफेद सुन्दरी( कहानी ) धारावाहिक-2

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सफेद सुन्दरी( कहानी ) धारावाहिक-2

बादशाह बहुत परेशान हो गए ।बादशाह ने, बेगम ने,शहज़ादे ने और बड़े बड़े अहिलकारों ने अक्ल के घोड़े दौड़ाए पर कुछ समझ नहीं आ रहा था । किसी ने बताया कि पानी न निकलने का कारण एक रूहानी पहुंचा हुआ खुदा का बंदा है वो ही बता सकता है । बादशाह और बेगम को पैदल चल कर उनके पास जाना होगा । प्रजा के लिए बादशाह और बेगम चल कर उस रूहानी पैगंबर के पास गए । उस नेक रूह ने बादशाह को बताया कि ये सब अनहोनियां जो हो रही हैं इनके पीछे शाही परिवार का नेकनियती को भूल कर प्रजा का बुरा सोचना है । बादशाह ने हैरान हो कहा,” नहीं पीर बाबा हमारे परिवार में कोई ऐसा नहीं है जो बुराई की राह पर चले।”
पीर बाबा ने कहा कि अगर मैं सिद्ध कर दूँ तो आप उसे क्या सज़ा दोगे ? बादशाह ने जवाब दिया ,” हम उसका सर कलम करवा देंगे जो प्रजा पर ज़ुल्म कर रहा होगा या जिसने प्रजा पर ज़ुल्म किया होगा।” पीर बाबा ने कहा कि जैसे ही इन्साफ होगा पूरे देश में खुशहाली छा जाएगी और आपकी जा चुकी छः बादशाहतें भी वापस मिल जाएंगी ।बादशाह बोले पीर,” बाबा उसका नाम बताओ और सबके सामने सिद्ध करो। भले ही वह हम क्यों न हों सज़ा ज़रूर मिलेगी । “

पीर बाबा ने अपनी करिश्माई ताकत से बादशाह को शहज़ादे की पत्नी के उस अंधेरे पहलू से परिचित करवाया जिस पर आज तक पर्दा पड़ा हुआ था । पीर बाबा ने चमत्कारी चादर फैला कर उस पर वो सब दृश्य सजीव कर दिए जिनमें शहज़ादे की धूर्त पत्नी न सिर्फ शहज़ादे को धोखा दे रही थी बल्कि औरतों,बच्चों और कमज़ोरों पर अत्याचार भी कर रही थी । महल की गरीब नौकरानियाँ उनके बच्चे, महल के नौकर और बूढ़े कर्मचारी उसके अत्याचारों के शिकार हो रहे थे यहाँ तक कि कईयों की मौत हो गई।पीर बाबा ने ये भी सिद्ध किया कि अकसर वो दरबार के फैसलों को भी प्रभावित करती थी जिससे युद्ध छिड़ गए और रियासतें नेस्तनाबूद हो गईं ।बादशाह और बेगम की आँखें फटी की फटी रह गईं । बादशाह ने पीर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया और गुस्से व आत्मग्लानि की भावना से भरा महल की ओर चल दिया ।महल में पहुंचते ही बादशाह ने भरे दरबार में शहज़ादे को अपनी पत्नी को पेश करने को कहा। शहज़ादा हैरान था कि आखिर हुआ क्या है ? बादशाह ने तुरंत उस धूर्त औरत को सज़ा-ए-मौत सुना दी।शहज़ादा कुछ समझ नहीं पा रहा था ।बादशाह ने हुक्म दिया कि कल सुबह शहज़ादे की ज़ालिम पत्नी का सर क़लम कर दिया जाएगा ।

 

स्वर्ण की उस प्रतिमा पर पहरे लगा दिए गए । ये सुनिश्चित हो गया कि उसे कल मौत के घाट उतार दिया जाएगा । शहज़ादे ने बेचैनी से अपनी प्रिय पत्नी को देखा जो पृथ्वी पर किसी लता की तरह लोट रही थी । उसकी मृग जैसी विशाल आँखें रो रो कर टेसू के फूलों के समान लाल हो गईं थी। उसकी रेशम की तरह कोमल केशराशि फर्श पर दूर तक फैली थी। गुलाब के फूलों जैसा उसका गुलाबी रंग मौत के डर से चंपा के फूलों जैसा पीला पड़ गया था।शहज़ादा बेचैनी से अपनी माँ के पास गया वो जानना चाहता था कि आखिर माजरा क्या है । माँ ने उसे सभी बातें विस्तार से बताईं। शहज़ादा नाराज़ हो कर बोला कि ऐसे ही किसी के कहने पर बादशाह सलामत मेरी पत्नी को मौत की सज़ा नहीं दे सकते।शहज़ादे ने अपने पिता के फैसलों के खिलाफ बोलना नहीं सीखा था। वो अपनी पत्नी को मिली सज़ा-ए-मौत के खिलाफ कुछ नहीं बोल सकता था । इसलिए शहज़ादे ने एक बहुत बड़ा फैसला किया । शहज़ादे ने अपनी बेहद् सुंदर पत्नी को लेकर रातों रात फरार हो जाने की योजना बनाई। शहज़ादे का इस तरह चले जाने का अर्थ है एक सुंदर भविष्य को ठुकरा कर दर दर भटकना । शहज़ादे को बादशाहत मिलने वाली थी पर वो ये सब एक ऐसी सुंदरी के लिए ठुकरा रहा था जो उसके लिए शहज़ादे को बादशाह से भिखारी बना देख कर भी अपने अंदर की बुराई को छोड़ने वाली नहीं थी।
वक्त के रंग देख कर किस्मत ने माथा पीट लिया । अब शहज़ादे को कौन समझाए कि जिस के लिए वो इतना बड़ा कदम उठाने जा रहा है वो इस लायक़ है ही नहीं ।
Continue. ….
नवीन किरण,हिंदी अध्यापिका,करतारपुर।

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