सीख

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सीख

थोड़ी दुनियादारी सीख
अपनी जिम्मेदारी सीख

अहं छोड़ कर “मै” का अपने
“हम” में हिस्सेदारी सीख

मन मर्यादा मानवता की
बातें तू संस्कारी सीख

मित्र तेरे हो साथ मगर
दुश्मन से भी यारी सीख

दर्द छुपा कर दिल मे अपने
हँसने की लाचारी सीख

मुफलिसी मे रखनी कैसे
जेब हमेशा भारी सीख

हम तो अपनी खेल चुके
अब तेरी है पारी सीख

प्रमोद सनाढ़्य
राजसमन्द

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अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

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