सफेद सुन्दरी( कहानी)धारावाहिक-1

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सफेद सुन्दरी ( कहानी)

उसका दिल काला था जैसे स्याह रात का स्याह अंधेरा । उसकी सोच डरावनी थी जैसे गहरे कुएं से लौट कर आती किसी की डरावनी आवाज़ । उसके तसव्वुर लिजलिजे चिपचिपे रेंगते कीड़ों के जैसे थे। पर छलावे के जैसा उसका रूप अति सुंदर ।साँप और आग डसते हैं और जलाते हैं पर सुंदर बहुत लगते हैं । वो भी ऐसी ही थी।अतीव सौंदर्य की स्वामिनी और छल प्रप॔च से भरी। मानो किसी ने स्वर्ण कलश में कीचड़ भर के रखा हो।

उस सुंदर मुख को देख कर कौन कह सकता था कि वो कितनी धूर्त है । उसके मन में अमावस की रात के अंधेरे की तरह बुराइयां भरी थी । बिना किसी निज लाभ के वो दूसरों का बुरा सोचने वाली थी और बिना कारण दूसरों को दुःख देने की सोच उस पर लगातार हावी रहती थी ।
उसका सौन्दर्य दिन दिहाड़े आँखों में धूल झोंक देने वाला था। जैसे कोई ठग जब ठगी करता है तो मासूम जिसको ठगा जा रहा हो कुछ भी नहीं जान सकता ऐसे ही उस ठगिनी के जाल में फंसा मनुष्य अंत तक उसकी धूर्तता को पहचान नहीं पाता था । रक्त पिपासु पेड़ों की तरह जो चुपचाप रात को अपनी छाँव में सोए यात्री को निगल जाते हैं, वो भी ऐसी ही थी ।
आह! देखो उसके मोह पाश में कौन बंध गया। सात बहनों का इकलौता भाई, सात बादशाहतों का इकलौता शहज़ादा उस महाठगिनी , मोहमाया में डूबी , धोखे की जीती जागती मिसाल के जाल में फंस गया ।

शहज़ादा था मासूम नेक दिल पर जाँबाज़ बहादुर । शहज़ादे का हौसला पहाड़ों को चीर कर रख देने वाला था। नेकी के दरिया के समान वो शाँत और लगातार बहने वाला था । बुराई उसे कभी छू कर भी नहीं गुज़री थी। चट्टान की तरह मजबूत शरीर वाला शहज़ादा फूलों जैसा कोमल दिल रखता था।सात बादशाहतों का अकेला वारिस प्यार के दो बोलों में बिक जाने वाला था। शहज़ादे ने कभी अपनी दौलत और ताकत का प्रयोग किसी को परेशान करने के लिए नहीं किया था।
ऐसा नेक शहज़ादा उस छल और निर्दयता की मिट्टी से बनी सुनहरी मूरत पर फिदा हो गया था । सब वक्त का फेर था वर्ना इतनी दुआओं और नेकियों के साये में रहते हुए भी शहज़ादा क्योंकर उस ठगिनी के जाल में फंसता। होनी को कोई नहीं टाल सकता। नेक दिल शहज़ादा काले स्याह दिल वाली महा सुंदरी को ब्याह कर अपने पिता के विशाल सम्राज्य में ले आया।
समय ने साँस थाम ली इस इंतज़ार में कि अब इस सम्राज्य और शहज़ादे का क्या होगा?

बेमिसाल सुंदरता की मूरत को देख कर बादशाह पिता और बेगम माँ बहुत प्रसन्न हो गए। प्रजा की खुशी का ठिकाना न रहा।कोई नहीं जानता था कि ये चार दिन की खुशियां हैं ।
नई दुल्हन को हर समय हुक्म चलाने की रहती। वो ऐसे ऐसे फैसले सुनाती जो निर्दयता की सीमाएं लांघ जाते और इतनी शातिरता से अपना काम करती कि उसका नाम कहीं नहीं आता। इल्ज़ाम हमेशा दूसरों पर जाता। नौकर चाकर महल की नौकरी छोड़ कर भागने लगे । काली सोच वाली नई दुल्हन के काले विचारों का साया बादशाह के दरबार तक जा पहुंचा। दरबार में शहज़ादे के ज़रिए ऐसे फैसले पहुंचने लगे कि बादशाहतें एक एक करके गलत फैसलों के कारण युद्ध की आग में होम होने लगी।
कोई समझ नहीं पा रहा था कि ये सब क्या हो रहा है । देखते ही देखते बादशाह के हाथों में सिर्फ एक बादशाहत रह गई बाकी सब नेस्तनाबूद हो गईं ।
उस स्याह दिल वाली सफेद सुंदरी को एक अनोखा आनंद प्राप्त हो रहा था। उसको हित अहित कुछ समझ नहीं आ रहा था उसे सिर्फ बरबादी के मंज़र सुहाने लग रहे थे ।
फिर वो दिन आया जो अपने साथ एक अजीब फैसला ले कर आया ।

जहाँ नेकी नहीं होती वहाँ बरक़त भी नहीं रहती। छः बादशाहतें मिट गईं एक बची थी उस पर भी मनहूसियत का साया बन कर आया अकाल। सूखा पड़ गया । धरती बंजर होने लगी।पेड़ इन्सान पशु पक्षी सब जीव पानी को तरसने लगे।सबने बादशाह से फरियाद की।बादशाह को भी एक मात्र बची रियासत की चिंता हुई । बादशाह ने माहिरों की सलाह पूछी। सबने एकमत हो कर कहा कि पूरे देश में जगह जगह पानी की बावड़ियाँ बनवाई जाएं। कुएँ खुदवाए जाएं ताकि पानी का प्रबंध हो सके।शहज़ादे की धूर्त पत्नी ने शहज़ादे को बहुत वरगलाया कि कुएँ और बावड़ियाँ बनवाना पैसे की बर्बादी है । “जिस तरह से हमारे हालात खराब हो रहे हैं हमें पैसा बचा कर रखना चाहिए ” बुराई की उस मूरत ने अपने शहज़ादे पति को बहुत समझाया पर इस बार उसकी एक न चली।
बावड़ियाँ और कुएँ बनवाने का काम ज़ोर शोर से चल पड़ा। सबको दुःख भरी हैरानी तब हुई जब पूरे देश में किसी भी बावड़ी या कुएँ में पानी की एक बूंद तक प्रकट नहीं हुई। गहराइयों तक खोद दिया गया पर पानी कहीं नज़र न आया। कहीं तो थोड़ा सा ही सही पानी निकलना तो चाहिए। पर ऐसा नहीं हो रहा था । जैसे पूरे देश पर श्राप का डरावना साया पड़ गया हो जो सबकी मौत मांग रहा था ।

To be Continue. …

नवीन किरण
हिंदी शिक्षिका
करतारपुर
7696157281

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1 COMMENT

  1. मजेदार रोचक बाल कहानी…पढ़ने की उत्सुकता जगाती…शुभकामनाएं..नवीन जी

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