समाज है पुकारता

3
452

प्रमाणिका छंद

सदैव साथ संग जो
अगाध प्रेम स्नेह हो।।
अपार राह ज्यों खुले
अबोध मीत ना भुले।।

न देश द्रोह क्यों सहे
अनाथ भाव ना रहे।।
जवान मौत देखता
विनाश काल झेलता।।

सुना रहा तुझे सुनो
न पाक रूप यूँ धरो।।
दुलार से कहें तुझे
दिमाग शांत हैं बुझे।।

समाज है पुकारता
जवान जो दहाड़ता।।
अमोघ को निवारणा
कुटुम्ब को विचारणा।।

 राजन सिंह,मो—7909047487
पता:- C-5/60B, गली न०:- 2
सादतपुर विस्तार
दिल्ली – 110094

Loading...
SHARE
Previous articleएक हसीन जहां
Next articleसफेद सुन्दरी( कहानी)धारावाहिक-1
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

3 COMMENTS

  1. सुप्रभात आदरणीया,
    भावुकता और हर्ष दोनों ही आपके इस वेब-साइट पृष्ठ को पा कर मंत्र-मुग्ध हो गये। आपसे साहित्य की गतिमानक जानकारी प्राप्त करने एवं जिज्ञासा-मूलक तत्वों की समाधान हेतु चर्या की विधिवत् जानकारी यदि मिले तो आपका सदैव आभारी और कृतज्ञ रहूँगा।
    आपका स्नेहिल अहिन्दी भाषी मित्र
    रामा श्रीनिवास ‘राज’
    mobile: 7063390712

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here