यह कैसा पाकिस्तान बना

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यह कैसे तुम आज़ाद हुए
जो लाशों पे आबाद हुए
चहु ओर एक श्मशान बना
यह कैसा पाकिस्तान बना
यह वीररस से भरी हुई
भक्ति की कोई किताब थी
खुशबू थी इसमें सूफियों की
सोहनी की सखी, चनाब थी
इस धरा पे सब इतराते थे
मस्ती मेंं रांझे गाते थे
बुल्ले को बातें आती थी
नानक को धरा यह भाती थी
यहां कोई शकरगंज आता था
जिसे जहां फरीद बुलाता था
थी मस्त-मलंगों की धरती
यहां मौत का बड़ा सामान बना
चहुओर एक श्मशान बना
ये कैसा पाकिस्तान बना…
तू कायदे आज़म बन बैठा
इस्लाम के कायदे भूल गया
हर रोज की पांच नमाज़ों के
वो मूक से वायदे भूल गया
ये कैसी तेरी लयाकत थी
जो लौ न बनी ,लाशें बिखरी
सुन जिन्ना तेरी बसाई हुई
ये खूनी धरती ना निखरी..
“अल्लाह हु अकबर “कहने वाले
“जिन्ना “तू खुद शैतान बना
चहुँओर एक श्मशान बना
यह कैसा पाकिस्तान बना..
मत समझो जिन्ना..आज़ादी
ये चीखती-सिसकती ..बर्बादी
जहां भजन-अजान भी सांझी थी
सांझी थी अमृत गुरुवाणी
जिन्ना तेरी खूनी जिद्द ने
ये कैसी मांगी कुर्बानी…
मासूमों को मरवा कर तू
कैसा जालिम भगवान बना..
चहुँँओर एक श्मशान बना..
यह कैसा पाकिस्तान बना..
राजकुुुमार,राज

सरकारी सीनियर सकेंडरी स्कूल
बल कलां,अमृतसर
9592968886
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