क्या वक्त आया साथियो by Dr.Purnima Rai

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क्या वक्त आया साथियो (गज़ल)

क्या वक्त आया साथियो इन्सां लड़े इन्सान से।
बेड़ी पड़ी है पाँव में बेटी डरे यजमान से।1)
ये उम्र जिस औलाद की खातिर हुई कुर्बान थी,
कन्धे पिता के दब रहे अब पुत्र के अहसान से।।2)
लहरें किनारा ढूँढती पथ से भटकती नाव जब,
मंजिल लहर को तब मिले लड़ती रहे तूफान से।।3)
ये प्रेम का ही है असर जलने लगा बुझता दिया,
लपटें उठी शोला बनी बस प्रेम की पहचान से।।4)
निज घर भुला के मन कहाँ तू पाये’गा अब चैन को,
तल्खी फिजा में अब भरी बस दूर रह व्यवधान से।।5)
सत्गुरु चरण की धूल को मस्तक लगायें “पूर्णिमा”
गुरु श्रेष्ठ जग में ही रहा हर बार बस भगवान से।।6)
बह्र–2212 2212 2212 2212
काफिया–आन
रदीफ — से

डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर।
drpurnima01.dpr@gmail.com

 

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