तुम्हें मुझसे जरा भी प्यार होता

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तुम्हें मुझसे जरा भी प्यार होता।
मेरे दिल में चुभा ना खार होता।

मिलन की बात होती हर पलों में,
मधुर दिन रात जीते हर पलों में,
कली खिलती दिलों की छैल छबिली,
सदा दिल ये गुलो गुलजार होता।
तुम्हें मुझसे जरा भी प्यार………….

नदी की धार का होता  किनारा।
तुम्हारा प्यार ही होता सहारा।
चलाते प्रेम की नैया अनोखी,
हमारा प्यार ही पतवार होता।
तुम्हें हम से अगर कुछ प्यार …….

नही डरना जमाने से सुनो अब।
डरा जो भी मरा ये मान लो अब।
जमाना कम करे चर्चा हमारी,
किस्सा सा छपा अखबार होता।
तुम्हें हमसे अगर कुछ प्यार….

नही मुझको सताओ पास आओ।
सताता जग हमें अब तो बुलाओ।
निगाहें ढूँढती मुझको कभी जब,
उन्हीं में बस मिलन संसार होता।
तुम्हें हमसे अगर कुछ प्यार……….

तुम्हारा नाम ही बस काम मेरा।
मेरा हर काम है बस काम तेरा।
जमाने से बचाते ना अगर तुम,
सदा को नाम बस बेकार होता।
तुम्हें हमसे अगर कुछ प्यार…..

संगीता पाठक,सहारनपुर

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