मैं भारत हूँ

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मैं भारत हूँ

मैं भारत हूँ
मैं तुम से कुछ नहीं माँगता,
पालक पोषक हूँ तुम्हारा,
खिलाया तुम्हें अपने अंक में भरकर,
संभाला एक कोमल फूल की भाँति !!
इस अपनत्व के बदले में
मैं तुम से——-।
सिर्फ याद करवा रहा हूँ तुम्हें,
आजादी की दास्तान
अनेक माताओं ने अपने सुत दिये थे वार
सिंदूर सजी माँग उजड़ गई,
ओढ़ा दिया गया सफेद वसन!
राखियाँ भाइयों का इंतजार करती रह गई।
मैं तुम से—–।
अब तुम केवल अपना फर्ज निभाओ,
जाति धर्म पर न मुझे बंटवाओ,
सदियों से धोखा खा रहे हो,
मेरे दिल की आवाज तुम मत दबाओ।
मैं तुम से कुछ ——।
अब बात करो मेरे विकास की,
भूल जाओ बात रंग और जात की,
मुझे अब श्रेष्ठ बनाओ,
संसार में मुझे सर्वश्रेष्ठ बनाओ,
मैं भारत हूँ तुम से बस अब यही माँगता।

दीपक कुमार , हिंदी शिक्षक ,जालंधर।

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