उम्मीद

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उम्मीद 

उम्मीद 
एक जिंदा लफ्ज़ है
इस जिंदा लफ़्ज ने 
जिंदा रखे हैं
कितनों के सपने
टूटने से बचाया है
कितने रिश्तों को
और
धरती भी
अपनी कील पर
पर नहीं
उम्मीद पर टिककर
अंतरिक्ष में घूमती है
……शायद हब्बल दूरबीनों को
ग़लत लगे मेरी बात
मगर….सच यह है
जिसे वे कील कहते हैं
उसे मैं उम्मीद कहता हूँ.

 गौतम कुमार सागर

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