सत्या शर्मा ” कीर्ति “: मैं आजाद हूँ(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

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सत्या शर्मा ” कीर्ति “: मैं आजाद हूँ

आओ आज मानते हैं आजादी का जश्न
तुमने दिया मुझे नव भविष्य की कल्पना
और आजाद होने की अनुभूति ।

और हो गयी मैं आजाद…..
तोड़ दी सारी बंदिशें……
अपनी मासूमियत भरी कोमल भावनाओं
का चोला उतार फेंका मैने
क्यों जकड़ कर रखूँ खुद को
मर्यादा ,सभ्यता , शान्ति और देश-प्रेम
की जंजीरों से ।

मैं आजाद हूँ …..
मुझे क्या लेना कि
बीच बाजार किसी की मासूमियत
से खेली जाये / भरे बाजार किसी लाचार
बाप की पगड़ी उछाल दी जाये / मासूमों को
बेच दिया जाये …

मैं तो आजाद हूँ …
मुझे कोई फर्क नही पड़ता
भगत सिंह , चन्द्रशेखर ,सुभाषचंद्र बोस
जैसे देश भक्तो के बलिदान से ।

मैं तो आजाद हूँ …..
काला धन से तिजोरियों को भरने
के लिए / सांस्कृतिक धरोहरों पर अपने
नाम गुदवाने के लिए / गरीबों के जमा पूंजी
पर अपने लिए महल बनाने के लिए ।

मैं आजाद हूँ ….
मुझे फर्क नही पड़ता / उजाड़ जाने दो
ये उपवन ये मनभावन जंगल / बन जाने दो
कंक्रीटों के महल / हो जाने दो गंगा को अपवित्र।

मुझे क्या मै आजाद हूँ ….
सुनों,
तुम भी आजाद हो मेरी तरह
अपने वर्तमान की व्यापकता को पहचानो
मत पोछो किसी के आँशु
मत दिखाओ सहानुभूति वाले बादल ।

चलो मिल कर खाते हैं बारुद ,
पीते हैं रक्त और लगाते हैं जोर का अट्टहास

कि मैं आजाद हूँ ………

सत्या शर्मा ” कीर्ति “
जन्म : 30 जून
शिक्षा : एम . ए, एल एल . बी
मूल निवास : पटना ( बिहार )
वर्तमान निवास : राँची ( झारखण्ड )

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