रेनू सिरोया कुमुदिनी”: सूनी राखी(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

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रेनू सिरोया कुमुदिनी”: सूनी राखी
भाई बिन तरसी है अँखियाँ, सूना-सूना आँगन है
कितना खाली पन पसरा है
मेरे तन्हा जीवन में
किससे रूठूँ किस संग खेलूँ
किससेे मन की बात करूँ
बिना कलाई सूनी राखी, झगड़ा किसके साथ करूँ
दिल की कलियाँ मुरझाई है
भाई के बिन में बगियन में
जब जब रक्षा बंधन आया, नैनों से सावन बरसा
जल बिन मछली तड़पे जैसे
मेरा प्यासा मन तरसा
काश एक भाई होता जो भरता खुशियाँ दामन में
कहता पकड़कर मेरी कलाई में हूँ तेरे साथ सदा
प्यारी बहना दुखी न होना रखना तू विश्वास सदा
भाई बिन ये कौन कहे अब
भीगी कुमुदिनी अँसुवन में
रेनू सिरोया कुमुदिनी” (जैन)
जन्म तिथि-24 फ़रवरी
शिक्षा–एम ए – हिंदी व संस्कृत
रूचि –
लेखन, गायन, भ्रमण, गृह सज्जा …
लेखन विधा गद्य व पद्य दोनों में– कविताये, निबंध, मुक्तक, भजन, शेर -शायरी
बचपन से सामाजिक, धार्मिक, साहित्यिक व सांस्कृतिक मंचो पर प्रस्तुति
प्रकाशित कृतियाँ
गीत मेरे मीत, कारवाँ अभी बाकी है
मेरे गीतों की संगीत बद्ध CD चन्दा बादल में जाकर तू छिप जाना
कई पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन,
आकाशवाणी और दूरदर्शन से काव्य पाठ का प्रसारण
उदयपुर राजस्थान
पिन 313001
मो –09782404115
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