रेनू सिरोया कुमुदिनी:जय जय भारत की(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

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रेनू सिरोया कुमुदिनी:जय जय भारत की
स्वतंत्रता का दिन ये आया ,
गाये मंगलगान
जय-जय भारत की, जय तिरंगे की
मुक्त गगन में फहरे तिरंगा,
है अपना अभिमान
जय जय भारत की जय तिरंगे की —–
गांधी सुभाष नेहरू इस भारत की शान है
भगत आज़ाद भी इस मिट्टी की आन है
आज़ादी का जश्न मनाये लेकर इनका नाम
जय जय भारत की जय तिरंगे की —-
इस आज़ादी के खातिर वीरों ने प्राण गंवाए है
किया कुर्बान खुद को हंसकर शीश कटाये है
भारत ये धड़कन है हमारी गौरव और सम्मान
जय जय भारत की जय तिरंगे की —–
ऋषि मुनियों से पूजित,पावन ये तीर्थ धाम है
गंगा जमुना जहाँ बह रही आठों याम है
अनेकता में एकता हिंदुस्तान की है पहचान
जय जय भारत की जय तिरंगे की —
पंद्रह अगस्त का शुभ दिन आज ये आया है
मन में उमंगें भरी,खुशियों के साज़ ये लाया है
खिली “कुमुदिनी”आज़ादी में , मिला है ज्यूँ वरदान
जय जय भारत की जय तिरंगे की —
रेनू सिरोया कुमुदिनी” (जैन)
जन्म तिथि-24 फ़रवरी
शिक्षा–एम ए – हिंदी व संस्कृत
रूचि –
लेखन, गायन, भ्रमण, गृह सज्जा …
लेखन विधा गद्य व पद्य दोनों में– कविताये, निबंध, मुक्तक, भजन, शेर -शायरी
बचपन से सामाजिक, धार्मिक, साहित्यिक व सांस्कृतिक मंचो पर प्रस्तुति
प्रकाशित कृतियाँ
गीत मेरे मीत, कारवाँ अभी बाकी है
मेरे गीतों की संगीत बद्ध CD चन्दा बादल में जाकर तू छिप जाना
कई पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन,
आकाशवाणी और दूरदर्शन से काव्य पाठ का प्रसारण
उदयपुर राजस्थान
पिन 313001
मो –09782404115
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