प्रशान्त मिश्रा “मन”:कारगिल दिवस(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

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प्रशान्त मिश्रा “मन”:कारगिल दिवस(कुकुंभ छंद)

हमी से तुम सब अलग होकर,
हमें आँखें दिखाते हो।
हमी पर घाव देकर फिर,
हमी से बात करते हो।

तुम्हीं से लश्कर, ज़ेहाद है,
फिर तुम्हीं नाटक दिखाते।
बातें लड़ने की आती,
खुद को शांतप्रिय बताते।

याद नहीं है तुमको शायद,
रात जवानों का सोना।
खटक रहा भारत को अब तक,
वीर सपूतो का खोना।

तुम कायर इस क़ाबिल ना हो,
हम से हाथ करो दो दो।
सोए हुए जवान को मारे,
अब जा कर डूब मरो तो।

लगता है तुम भूल चुके हो,
भारत के एहसान सारे।
हम जूते तले कुचल डाले,
तेरे ये अरमान प्यारे।

कारगिल पर भारत का झण्डा,
था शानों से लहराया।
खड़े हुए छाती पर तेरे,
तब जन गण मन भी गाया।

तुम चोरों से बने फिरे यूँ,
कैसे घुसपैठ किये हो।
पकड़ गए तो मर जाओगे,
हम बैठे क़सम लिए जो।

प्रशान्त मिश्रा “मन”

क्वॉलिफिकेशन- डिप्लोमा व बी टेक(इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजिनियरिंग)
राज्य- उत्तर प्रदेश
जिला – महराजगंज
पिन – 2731155
मो. – 9415337459
इ मेल – m.prashant11.11@gmail.

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