प्रशान्त मिश्रा “मन”: राखियाँ(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

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प्रशान्त मिश्रा “मन”: राखियाँ

ज़िंदगी की कर रही है यूँ हिफाज़त राखियाँ।
है बहन की एक मेरे यह अक़ीदत राखियाँ।

प्यार से जीते जहां को एक है गुड़िया मेरी।
हाथ में थामे कलाई है मुहब्बत राखियाँ।

फ़ौज का हूँ इक सिपाही याद आता घर सदा।
वक़्त पर मैं घर पहुँच लूँ एक चाहत राखियाँ।

याद आते हैं बहन के हर ख़ुशी के पल मुझे।
माथ पर करके तिलक देती है दौलत राखियाँ।

पाक सा बन्धन बहुत ये जान से भी प्रिय मुझे।
मैं यहाँ सब कुछ लुटा दूँ सच है इफ़्फ़त राखियाँ।

बाँध कर यूँ हाथ में धागे मुहब्बत प्यार के।
कर रही है ये दुआ कहती इबादत राखियाँ।

हर जनम तू ही मिले बहना मे’री मुझको सदा।
छू रहा ‘मन’ राखियों को इसकी’ राहत राखियाँ।

प्रशान्त मिश्रा “मन”

क्वॉलिफिकेशन- डिप्लोमा व बी टेक(इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजिनियरिंग)
राज्य- उत्तर प्रदेश
जिला – महराजगंज
पिन – 2731155
मो. – 9415337459
इ मेल – m.prashant11.11@gmail.com

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