नीरजा मेहता:कलाई से कोहनी तक(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

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नीरजा मेहता:कलाई से कोहनी तक (संस्मरण)

“न हो जुदा कोई बहन
अपने भाई से कभी,
हर एक कलाई पर धागा हो
ये दुआ करना सभी।”

बचपन से ही राखी का पर्व हम भाई बहन की उत्सुकता बढ़ा देता था। मेरा एक ही भाई है और मैं उनकी इकलौती सगी छोटी बहन। परिवार हमारा बहुत बड़ा नहीं था किंतु हमारे बहुत से कुछ पास के और कुछ दूर के रिश्तेदार लखनऊ में ही रहते थे।
राखी की तैयारी मैं बहुत जोश से करती थी। भाई की पसंद की बड़ी सी राखी लाना, उनके पसंद की मिठाई लाना, रोली अक्षत से सजी राखी की थाली मुझे बहुत पसंद थी तो भाई को माथे पर लम्बा टीका और उस पर लगे चावल के दाने बहुत पसंद थे।
उन दिनों स्पंज पर बनी खूबसूरत राखियाँ बहुत मिलती थीं और भाई को बड़ी-बड़ी राखी पहनने का बेहद शौक था। कलाई से कोहनी तक जब तक हाथ भर न जाये तब तक भाई को राखी के पर्व का आनंद ही नहीं आता था। हम बहनें मिलकर उनको बड़ी- बड़ी खूबसूरत राखियाँ बांधतीं और भाई पूरा दिन सबको अपना हाथ दिखाते फिरते।
कुछ वर्ष बाद पिताजी ने भाई को आगे की पढाई के लिए देहली भेज दिया। भाई बिना घर सूना लगने लगा पर होली दीवाली आदि बड़े पर्वों पर भाई के घर आने से रौनक लौट आती किन्तु राखी के पर्व पर कभी परीक्षा के कारण तो कभी पढाई के जोर के कारण वो नहीं आ पाते थे किन्तु फिर भी मैं थाल सजाकर बड़ी सी राखी लाकर उनका इंतज़ार करती थी।
इस तरह सूनी राखी के पाँच वर्ष बीत गए। उस दिन भी राखी थी, मैंने हमेशा की तरह नारियल, पुष्प, रोली, अक्षत, मिठाई, दीप और पिछले सालों की राखियों के साथ नयी राखी भी रखकर थाल सजा लिया था और उनके इंतज़ार में बैठी थी। भाई के आने की उम्मीद नहीं थी किन्तु अचानक दरवाज़े पर पैरों की आवाज़ सुनाई दी, भाई की आहट भी मैं पहचानती थी, मन में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी, भाग कर दरवाज़ा खोला, सामने भाई को देखकर ख़ुशी के आंसू निकल पड़े।
भाई के आते ही घर में उत्सव का सा माहौल हो गया, चहल- पहल मच गयी। आस पास रह रहीं सभी बहनों को भाई के आने का समाचार भिजवा दिया गया। माँ ने भी तरह-तरह के पकवान बना डाले। हम बहनों ने मिलकर भाई के चमकते चौड़े मस्तक पर लम्बा टीका लगाया, उस पर चावल के दाने चिपकाये फिर उनको राखियाँ बांधीं और मज़ा तो तब आया जब इस बार उनके दोनों हाथ कलाई से कोहनी तक भर गए। भाई ने भी हम बहनों का मान रखा और रात तक एक भी राखी नहीं उतारी।हर वर्ष हम राखी का पर्व मनाते हैं किन्तु वो दिन भुलाये नहीं भूलता, उस दिन जो ख़ुशी मिली वो अवर्णनीय है। आज भी वो क्षण याद कर मैं रोमांचित हो जाती हूँ।

नीरजा मेहता

नीरजा मेहता
: बी-201, सिक्का क्लासिक होम्स,
कौशाम्बी, गाज़ियाबाद (यू. पी.)
मोबाईल/ईमेल — 9871028128, 9654258770
mehta.neerja24@gmail.com

 

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