धर्मेन्द्र अरोड़ा “मुसाफ़िर” :राखी(राखी और आज़ादी,विशेषांक-अगस्त 2017)

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धर्मेन्द्र अरोड़ा “मुसाफ़िर” :राखी

(गज़ल)

सावन में जब आती राखी!
पावन प्यार लुटाती राखी!!

सदा बहन की रक्षा करना!
भाई को सिखलाती राखी!!

जिसकी कोई बहन न होती!
उसको खूब रूलाती राखी!!

मधुरिम,सुंदर रूप से अपने!
सबका मन हर्षाती राखी!!

दिल में निश्चल जोत जलाकर!
मंद- मंद मुस्काती राखी!!

सावन में जब आती राखी!
पावन प्यार लुटाती राखी!!

धर्मेन्द्र अरोड़ा “मुसाफ़िर”
9034376051
संपर्क:मकान न;1539,न्यू हाऊसिंग बोर्ड कालोनी,पानीपत
(हरियाणा)
ईमेल: dharmenderarora.
rajyogi@gmail.com

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